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  • Ashwini Vaishnaw Davos: IMF ने उठाया सवाल, तो अश्विनी वैष्णव ने 5 पॉइंट्स में दिखा दी भारत की असली AI ताकत

    दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में भारत ने साफ कर दिया है कि अब हम किसी से पीछे नहीं हैं। दरअसल, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भारत को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की शक्तियों में ‘दूसरे ग्रुप’ में रखा था, जिस पर आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने करारा जवाब दिया है। रिपोर्ट के अनुसार,(REF.) उन्होंने


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    By Azad Hind Desk जनवरी 21, 2026
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    दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में भारत ने साफ कर दिया है कि अब हम किसी से पीछे नहीं हैं। दरअसल, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भारत को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की शक्तियों में ‘दूसरे ग्रुप’ में रखा था, जिस पर आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने करारा जवाब दिया है। रिपोर्ट के अनुसार,(REF.) उन्होंने IMF की इस रैंकिंग को न सिर्फ पुराना बताया, बल्कि इसे हकीकत से परे भी करार दिया। मंत्री जी ने स्टैनफोर्ड के आंकड़ों का हवाला देते हुए दुनिया को बताया कि भारत एआई की तैयारी के मामले में दुनिया में तीसरे नंबर पर है। आज का भारत सिर्फ एआई का इस्तेमाल नहीं कर रहा, बल्कि चिप से लेकर ऐप्स तक खुद अपनी एआई दुनिया यानी कि ईकोसिस्टम बना रहा है।

    IMF की पुरानी सोच और भारत का नया सच

    अश्विनी वैष्णव ने IMF चीफ क्रिस्टालिना जॉर्जीवा के सामने रैंकिंग के ‘पैमाने’ पर ही सवाल उठा दिए। उन्होंने कहा कि रैंकिंग का यह तरीका वास्तविकता को नहीं दर्शाता। मंत्री ने स्टैनफोर्ड की ग्लोबल रिपोर्ट का जिक्र किया, जो डेटा के आधार पर भारत को एआई रेडीनेस में दुनिया का तीसरा सबसे शक्तिशाली देश मानती है। भारत किसी एक क्षेत्र में नहीं, बल्कि पांच अलग-अलग लेवल जैसे कि एप्लीकेशन, मॉडल्स, चिप्स, इंफ्रास्ट्रक्चर और ऊर्जा पर काम कर रहा है। यानी भारत सिर्फ ऊपर से चमकने वाली तकनीक नहीं बना रहा, बल्कि वह बुनियादी ढांचा तैयार कर रहा है जिस पर भविष्य की एआई दुनिया खड़ी होगी।

    दिखावा नहीं असली समस्याओं का समाधान

    इस मौके पर अश्विनी वैष्णव ने एक बहुत ही व्यावहारिक बात कही कि एआई की असली ताकत सिर्फ बड़े-बड़े मॉडल बनाने में नहीं, बल्कि असली दुनिया की समस्याओं को सुलझाने में है। उनके अनुसार, व्यापार और रोजमर्रा की ज्यादातर समस्याओं का समाधान 20 से 50 अरब पैरामीटर वाले मॉडल से ही हो सकता है। भारत अब ऐसे कई मॉडल्स का एक ‘गुलदस्ता’ तैयार कर रहा है, जिनका इस्तेमाल स्वास्थ्य, शिक्षा, खेती और व्यापारिक सर्विसेज में शुरू हो चुका है। भारत का लक्ष्य एआई के जरिए उत्पादकता बढ़ाना और आम नागरिक के जीवन को आसान बनाना है, न कि सिर्फ दिखावे की टेक्नोलॉजी विकसित करना।

    AI की रेस में भारत की अपनी राह

    इस मौके पर वैष्णव ने साफ कहा है कि एआई के मामले में भारत किसी गुट जैसे कि अमेरिका या चीन में शामिल नहीं हो रहा बल्कि वह अपनी एक स्वतंत्र और जिम्मेदार राह बना रहा है। भारतीय कंपनियां बिजनेस प्रोसेस को बेहतर समझने में माहिर हैं, इसलिए वे एआई को असली सिस्टम में जोड़कर दुनिया को बेहतरीन सेवाएं दे रही हैं। अगले महीने होने वाले ‘इंडिया एआई समिट’ में भारत पूरी दुनिया को अपनी इस ताकत का अहसास कराएगा।

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