पिता और दादा भी आर्मी में रहे
आज़ाद हिन्द से खास बातचीत में सीआरपीएफ की असिस्टेंट कमांडेंट सिमरन बाला ने बताया कि उनके परिवार से वह तीसरी पीढ़ी हैं। जिन्हें सीआरपीएफ के रूप में देश की सेवा करने का अवसर मिला है। उनसे पहले उनके दादा जी तीरथ राम चौधरी भी आर्मी में सूबेदार रहे और पिता विनोद कुमार चौधरी भी आर्मी से रिटायर हैं। अब वह अपने घर की थर्ड जनरेशन हैं। जो वर्दी में आईं हैं। अपने दादा और पिता को वर्दी में देख-देखकर बचपन से उन्हें भी वर्दी पहनने का सपना था। वह कश्मीर के नौशेरा की रहने वाली हैं। जो की पाकिस्तान बॉर्डर से करीब 10 किलोमीटर दूर है। यहां कभी भी पाकिस्तान की तरफ से गोलाबारी कर दी जाती है।
अपने परिवार से वर्दी पहनने का सपना देखा
दुश्मन को जवाब देने और अपने परिवार से वर्दी पहनने का सपना देख उन्होंने 2021 में यूपीएससी का एग्जाम दिया। पहले ही प्रयास में वह सफल हो गईं और उनकी रैंक एआईआर-82 रही। जनवरी, 2024 में उन्होंने सीआरपीएफ को जाइन किया और छह मार्च 2025 को वह ट्रेनिंग लेकर पास आउट हुईं। ट्रेनिंग के दौरान तीन बेस्ट ट्रॉफी में उनके नाम दो बेस्ट ट्रॉफी भी रहीं। बचपन से ही वह पाकिस्तान के छक्के छुड़ाने वाले लॉयन ऑफ नौशेरा नाम से ख्याति प्राप्त महावीर चक्र विजेता ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान से बहुत प्रभावित थीं।
पहली पोस्टिंग छत्तीसगढ़ में सीआरपीएफ की बस्तरिया बटालियन में हुईं
आज़ाद हिन्द को दिए इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि उनकी पहली पोस्टिंग छत्तीसगढ़ में सीआरपीएफ की बस्तरिया बटालियन में हुईं। जहां नक्सलियों के खिलाफ होने वाले एक्शनों में भी वह शामिल रहती हैं। उन्होंने कहा कि 26 जनवरी के दिन दिल्ली में कर्तव्य पथ पर सीआरपीएफ मेल कंटिंजेंट की पहली महिला कमांडर बनकर बहुत गर्व महसूस कर रही हैं। उन्हें पूरी सीआरपीएफ का भरपूर साथ मिल रहा है। इसके लिए वह आठ दिसंबर से अब तक हर दिन आठ से दस घंटे तक प्रैक्टिस कर रही हैं। इसमें सुबह कर्तव्य पथ पर प्रैक्टिस करना भी शामिल है।














