बसंत पंचमी पर पीले रंग का विशेष महत्व है। पीला रंग ज्ञान, ऊर्जा और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है। इसी वजह से सरस्वती पूजा में पीले वस्त्र, पीले फूल और पीले रंग का भोग लगाया जाता है। ज्योतिष शास्त्र में पीला रंग गुरु ग्रह से जुड़ा माना जाता है, जो ज्ञान, शिक्षा, भाग्य और समृद्धि का कारक है। इसलिए मां सरस्वती को पीले रंग की चीजों का प्रसाद चढ़ाना शुभ फल देने वाला माना जाता है।
बसंत पंचमी पर पीला भोग
सरस्वती पूजा के दिन मां को केसर वाली खीर, बूंदी और बेसन के लड्डू, पीले चावल, मालपुआ, केसर से बना हलवा और धनिए की पंजीरी का प्रसाद मां को अर्पित किया जाता है। ज्योतिष में खीर को मानसिक शुद्धता और शांति का प्रतीक माना जाता है, जबकि लड्डू को सफलता और पीले चावल समृद्धि का प्रतीक माने जाते हैं।
बसंत पंचमी पर पंचामृत का भोग
बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती को प्रसाद के तौर पर केला, बेर, सेब, नारियल और मौसमी फल भी अर्पित किए जाते हैं। नारियल को एकाग्रता का प्रतीक माना जाता है। इस दिन मां को पंचामृत- दूध, दही, घी, शहद और शक्कर अर्पित करने से विद्या और वाणी में मधुरता का आशीर्वाद मिलता है।
सरस्वती पूजा के प्रसाद का महत्व
बसंत पंचमी के दिन शुद्ध मन और श्रद्धा पूर्वक तैयार किए गए प्रसाद से ग्रह दोष शांत होते हैं। इसके साथ ही बुध और गुरु से जुड़े दोषों में भी कमी आती है। खास तौर पर छात्रों के लिए यह दिन विशेष फलदायी माना जाता है। वहीं, सरस्वती पूजा के बाद प्रसाद ग्रहण करने से स्मरण शक्ति और एकाग्रता बढ़ती है।














