करियर के शुरुआती दौर में आप किसिंग किंग के तौर पर टाइपकास्ट कर दिए गए थे। मगर आपने उस इमेज को तोड़ा और अपनी वर्सिटिलिटी साबित की। अब बतौर कलाकार आप कितने संतुष्ट हैं?
मैं बहुत संतुष्ट हूं। पिछले 10-12 सालों में मेरा रास्ता पूरा बदल चुका है। इसमें ओटीटी का भी हाथ रहा, क्योंकि ओटीटी के आने के बाद इंडस्ट्री में ही एक पूरा 180 डिग्री का शिफ्ट आया है। ऑडियंस का टेस्ट, स्टोरी टेलिंग सब बदली है, जो हम एक्टर्स को ये ताकत देती है कि हम अपनी वर्सिटिलिटी दिखा सकें। हम एक्टर्स इसीलिए तो बने हैं। हालांकि, कुछ स्टार्स सालों तक उसी मोल्ड में वही कैरेक्टर्स करते रहते हैं, लेकिन ये उनकी चॉइस है। मैं हमेशा से अलग-अलग चीजें करना चाहता था। उस शुरुआती दस सालों में, उस टाइपकास्ट के जोन में भी मैंने अलग-अलग वैरिएशन लाने की कोशिश की, लेकिन बेसिक कैरेक्टर वही था तो संतुष्टि नहीं होती है। फिल्में भले चलती हैं लेकिन आपको खुद लगता है कि आप एक ही किरदार बार-बार कर रहे हैं। मतलब नींद में भी कर लो तो फिर मैंने ठान लिया कि वो नहीं करना है।
अच्छी बात ये रही कि फिल्ममेकर्स ने भी मुझ पर भरोसा जताया। आज मेरा फिल्म चुनने का बेंचमार्क यही होता है कि स्क्रिप्ट पढ़ते हुए अगर मुझे थोड़ा डर लगे कि मैं ये कर पाऊंगा या नहीं तो वो एक ग्रीन सिग्नल है कि ये निश्चित तौर पर करना चाहिए। जैसे, पिछली फिल्म ‘हक’ में बहुत ही जटिल किरदार था। नेगेटिव शेड था, पर वह असल में नेगेटिव नहीं है। उसकी परवरिश, उसकी कंडीशनिंग वैसी है। उसे निभाते हुए मुझे बहुत मजा आया क्योंकि वह बहुत कॉम्प्लेक्स किरदार था और मेरे व्यक्तित्व से बिल्कुल उल्टा था और किरदार आपसे जितना अलग होता है, उसके करीब पहुंचने में उतनी मेहनत लगती है। उतना ही मजा आता है।
उस दौर में आपको ये भी मलाल रहता था कि आप बेटे अयान को अपनी फिल्में नहीं दिखा पाते थे। अब वह टीनेजर हैं, अब उनकी आपके सिनेमा को लेकर क्या राय रहती है?
वह बहुत क्रिटिकल हैं और मैं इस चीज की हमेशा से बहुत कद्र करता हूं कि आपके करीबी, दोस्त आपकी परफॉर्मेंस पर खुलकर अपनी राय दे सकें। उन्होंने ‘बैड्स ऑफ बॉलीवुड’ देखी, चूंकि जेन जी वाला कॉन्टेंट था तो उनको बहुत पसंद आई। उन्होंने ‘हक’ भी देखी। हालांकि, वह एक मैच्योर लव स्टोरी है लेकिन उन्हें वह भी पसंद आई, मगर वह मेरे काम को लेकर क्रिटिकल हैं। वह एक नई पीढ़ी से हैं और आज की पीढ़ी के बच्चे बहुत ओपिनिएटेड हैं। उनकी अपनी राय है। पहले वाली फिल्मों की तो वह बहुत आलोचना करते हैं, क्योंकि वह आज की उस पीढ़ी से हैं, जहां चार साल की उम्र से उनके हाथ में आईपैड था, इंटरनेट था। आज चैट जीपीटी है, जिस पर हर चीज का हल मिल जाता है तो वह बहुत ही ज्यादा स्मार्ट हैं।
आपको भी उन पर गर्व होगा कि उन्होंने फिल्मी लेगेसी के आसान रास्ते के बजाय चेस को चुना है?
हां, अभी तो वो नॉन फिल्मी है। अभी तक तो उसने कभी कहा नहीं कि उसे इंडस्ट्री में आना है या फिल्में करनी है। वह अपने चेस कॉम्पिटिशन में खुश है। पढ़ाई में ध्यान दे रहा है। वैसे अभी तो सिर्फ 15 साल का है। अभी कॉलेज जाएगा तो अभी क्लैरिटी नहीं है कि आगे क्या करेगा।
आर्यन खान की वेब सीरीज ‘बैड्स ऑफ बॉलीवुड’ में आपका छोटा सा कैमियो खूब वायरल हुआ। आपको लगा था कि वो इतना पसंद किया जाएगा? आपकी क्या प्रतिक्रिया रही?
मुझे नहीं लगता कि किसी को भी अंदाजा था कि ऐसा होगा। हां, सीन बढ़िया था। वैसे, यह सीन पहले अलग होने वाला था। पहले सीन ये था कि मैं एक प्रीमियर पर हूं और राघव मेरा बड़ा फैन होगा। फिर दो महीने पहले आर्यन और बिलाल ने इसे इंटीमेसी कोच वाला स्पिन दिया। उन्होंने मुझे आइडिया सुनाया जो मुझे बहुत पसंद आया। उन्होंने शाहरुख (खान) सर को भी सुनाया। उन्हें भी अच्छा लगा तो मेरे हिसाब से ये इंटीमेसी कोच वाला एंगल मास्टर स्ट्रोक था लेकिन वायरल वाली चीज तो बस हो गई। मुझे भी बहुत हैरानी हुई। वैसे मैं इन चीजाें से थोड़ा डिटैच रहता हूं। हालांकि, ऐसा नहीं है कि मुझे अच्छा नहीं लगता। मुझे भी खुशी होती है पर मैं सोशल मीडिया पर इतना ऐक्टिव नहीं हूं। मुझे तो प्लैटफॉर्म वालों ने फोन करके बताया कि वो सीन इतना वायरल हो गया है।
अपनी नई सीरीज ‘तस्करी’ में आप कस्टम ऑफिसर के रूप में खासे नैचरल लगे हैं। इस रोल के लिए किस तरह रिसर्च की?
सच कहूं तो नीरज पांडे और राघव जयरथ (निर्देशक) की टीम ने कस्टम को लेकर काफी रिसर्च की थी कि किस तरह तस्करी होती है। सारा मटीरियल स्क्रिप्ट में था जो मुझे बड़ा रोचक लगा था। फिर भी मैंने कुछ कस्टम ऑफिसर से बात की। बाकी, मैं सालों से ट्रैवल कर रहा हूं तो दिमाग में बातें चली जाती है कि एक्सरे मशीन पर लोग कैसे चेक करते हैं? कनवेयर बेल्ट पर कैसे ध्यान देते हैं तो इस सबसे भी मदद मिली।














