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  • कंगाल पाकिस्तान ट्रंप को कहां से देगा 1000000000 डॉलर? वर्ल्ड बैंक और IMF के कर्ज में डूबा है देश

    नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय पहल बोर्ड ऑफ पीस (Board of Peace) का प्रस्ताव दिया है। इसमें 60 देशों के विश्व नेताओं को आमंत्रित किया गया है। यह एक ऐसा मंच है जो युद्ध से तबाह गाजा में शांति और पुनर्निर्माण के लिए काम करेगा। इन देशों में


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    By Azad Hind Desk जनवरी 22, 2026
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    नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय पहल बोर्ड ऑफ पीस (Board of Peace) का प्रस्ताव दिया है। इसमें 60 देशों के विश्व नेताओं को आमंत्रित किया गया है। यह एक ऐसा मंच है जो युद्ध से तबाह गाजा में शांति और पुनर्निर्माण के लिए काम करेगा। इन देशों में भारत और पाकिस्तान भी शामिल हैं। जो देश 1 अरब डॉलर का योगदान देंगे, उन्हें बोर्ड में स्थायी सीटें मिलेंगी। पाकिस्तान ‘बोर्ड ऑफ पीस’ का हिस्सा बनने के लिए तैयार हो गया है।

    यह फैसला ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान खुद आर्थिक तंगी से जूझ रहा है और खाड़ी देशों से मदद मांगने की कोशिश कर रहा है। यही नहीं, पाकिस्तान समय-समय पर वर्ल्ड बैंक और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से लोन लेता रहता है। पिछले महीने यानी दिसंबर में ही आईएमएफ ने पाकिस्तान को 1.2 अरब डॉलर देने की मंजूरी दी थी। इससे आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान को बड़ी राहत मिली है। यह पैसा पाकिस्तान को उसकी अर्थव्यवस्था को सुधारने में मदद करेगा। देश कई सालों से सबसे बड़े आर्थिक संकट से गुजर रहा है।
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    यूएई से भी लगाई मदद की गुहार

    पाकिस्तान सिर्फ वर्ल्ड बैंक और आईएमएफ से ही नहीं बल्कि यूएई के सामने भी हाथ फैला रहा है। पाकिस्तान ने हाल ही में यूएई से एक बड़े कर्ज को चुकाने की समय सीमा बढ़ाने की गुहार लगाई है। यह 2.50 अरब डॉलर का कर्ज जल्द ही वापस करना था। यह कर्ज 2021 में हुए एक समझौते का हिस्सा है। इसे दो किस्तों में चुकाना था। कर्ज की यह रकम स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान के पास जमा की गई थी।

    यूएई की मदद से पाकिस्तान आईएमएफ को खुश रखना चाहता है ताकि उसे और कर्ज मिल सके। पाकिस्तान अभी भी आईएमएफ से 7 अरब डॉलर के लोन प्रोग्राम के लिए समर्थन मांग रहा है। यह दिखाता है कि देश की अर्थव्यवस्था शायद उसकी विदेश नीति की महत्वाकांक्षाओं से थोड़ी कमजोर है। पिछले महीने वर्ल्ड बैंक ने पाकिस्तान को 700 मिलियन डॉलर (करीब 6270 हजार करोड़ रुपये) की नई वित्तीय सहायता मंजूर की थी। यह पैसा एक बड़े कार्यक्रम का हिस्सा है जिसका मकसद पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को स्थिर करना और सरकारी सेवाओं को बेहतर बनाना है।

    पाकिस्तान की मजबूरी या कुछ और?

    एक तरफ जहां पाकिस्तान कर्ज में गले तक डूबा है, वहीं दूसरी तरफ वह शांति के वादे वाले एक बोर्ड की स्थायी सदस्यता के लिए 1 अरब डॉलर खर्च करने जा रहा है। यह पाकिस्तान की मजबूरी है या कुछ और? ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में आठ इस्लामिक देश शामिल हैं, और पाकिस्तान अब उनमें से एक है। विदेश मंत्री इशाक डार ने इस फैसले का बचाव करते हुए कहा कि यह गाजा शांति योजना के प्रति पाकिस्तान के समर्थन के अनुरूप है। द ट्रिब्यून के अनुसार इशाक डार ने कहा, ‘हमें उम्मीद है कि यह बोर्ड स्थायी युद्धविराम को लागू करने की दिशा में ठोस कदम उठाने में मदद करेगा।’

    पाकिस्तान पर कितना कर्ज?

    पाकिस्तान इस समय गंभीर आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है। जून 2025 तक पाकिस्तान पर कुल कर्ज 286.832 अरब डॉलर तक पहुंच गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 13 प्रतिशत अधिक है। पाकिस्तान पर घरेलू लोन का भी काफी बोझ है।

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