WEF से आई जानकारी
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, दावोस में चल रहे वर्ल्ड इकॉनमिक फोरम से यह जानकारी निकलकर आई है, जहां दुनियाभर की सरकारों के नुमाइंदे पहुंचे हैं। भारत सरकार भी इसमें शामिल है और कई राज्य सरकारें वहां पहुंचकर अपने राज्यों के विकास के लिए दूसरे देशों के नेताओं-इंडस्ट्री लीडर्स से मुलाकात कर रही हैं।
मंत्री ने किया समर्थन
इस फोरम में आंध्र प्रदेश के आईटी मंत्री भी हैं। उन्होंने ब्लूमबर्ग से बातचीत में कहा कि निश्चित तौर पर कम उम्र के युवाओं को ऐसे प्लेटफॉर्म पर नहीं होना चाहिए क्योंकि वो उसके कंटेंट को पूरी तरह से नहीं समझते। ऐसे में एक मजबूत कानूनी ढांचे को बनाना जरूरी हो जाता है।
ऑस्ट्रेलिया के फैसले की दुनिया में चर्चा
पिछले महीने दिसंबर में जब ऑस्ट्रेलिया ने 16 साल से कम उम्र बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर बैन लगाया, तो पूरी दुनिया में इसकी चर्चा हुई। अब ऑस्ट्रेलिया बच्चे टिकटॉक, एक्स, फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब जैसे पॉपुलर प्लेटफॉर्म नहीं चला सकते। वह नया अकाउंट नहीं बना सकते और पुराने अकाउंट को भी उन्हें डिएक्टिवेट करना होगा। ऑस्ट्रेलियाई सरकार के इस फैसले की काफी चर्चा रही है। पैरंट्स इस फैसले से सहमत दिखे हैं, जबकि बच्चे खिलाफ। अब यही कदम अगर भारत में देखने को मिला तो इसका बड़ा प्रभाव हो सकता है।
गंभीरता से सोच रही सरकार
आंध्र प्रदेश के लोकल मीडिया में भी यह खबर चल रही है कि राज्य में छोटे बच्चों के लिए सोशल मीडिया को बैन करने पर वहां की राज्य सरकार गंभीरता के साथ सोच रही है। ऐसा हुआ तो आंध्र, देश का पहला राज्य बन जाएगा जो इस तरह का कदम उठाएगा।
4 प्रमुख सवाल जिनके जवाब जरूरी
- क्या आंध्र सरकार पूरी तरह से बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर बैन लगा देगी या कुछ ऐप्स को इससे बाहर रखा जाएगा?
- मौजूदा समय में यूट्यूब जैसे ऐप्स पर शैक्षणिक कंटेंट भी उपलब्ध है, क्या उसे भी नहीं देखा जा सकेगा?
- सिर्फ सोशल मीडिया इस्तेमाल करने से बैन किया जाएगा या अकाउंट बनाने की इजाजत भी नहीं होगी?
- इतने बड़े फैसले को अमल में लाने से पहले पैरंट्स की राय ली जाएगी?














