इसमें जांघ के टिशू से नया कुशन बनाकर मेनिस्कस की जगह लगाया गया। सर्जरी के बाद महिला को दर्द से राहत मिली है। अर्थराइटिस व घुटना ट्रांसप्लांट की जरूरत भी टल गई है। डॉक्टरों ने दावा करते हुए कहा कि इस तकनीक के जरिए देश में पहली बार सर्जरी की गई है। 13 जनवरी को डॉ. राहुल खरे की टीम ने डॉ. प्रणय गुप्ता, डॉ. रवि रंजन और डॉ. मोहित राज के सहयोग से सर्जरी की। करीब डेढ़ घंटे में सर्जरी पूरी हो गई।
बार-बार आती थी धुटने बदलने की नौबत
RML के ऑर्थोपेडिक डिपार्टमेंट के HOD डॉ. राहुल खरे ने बताया कि जांघ की हड्डी (फीमर) और पिंडली की हड्डी (टिबिया) के बीच मौजूद मेनिस्कस घुटने का कुशन होता है। यह दोनों हड्डियों को आपस में रगड़ से बचाता है। पहले ऐसे मामलों में मेनिस्कस निकाल दिया जाता था। इससे कुछ ही साल में अर्थराइटिस हो जाता था और बार-बार घुटना बदलने की नौबत आती थी। बाद में मेनिस्कस ट्रांसप्लांट की तकनीक आई, लेकिन भारत में यह आसान नहीं है।
रिपेयर के बाद नहीं हो पाती थी हीलिंग
डॉ. राहुल ने बताया कि घुटने में दो मेनिस्कस होते हैं। इनमें खून की सप्लाई बहुत कम होती है। करीब दो-तिहाई हिस्से में खून नहीं पहुंचता, इसलिए कई बार रिपेयर के बाद भी सही से हीलिंग नहीं हो पाती। इस महिला के साथ भी यही हुआ और पहले कराई गई सर्जरी फेल हो गई। मेडिकल डायरेक्टर डॉक्टर अशोक कुमार और मेडिकल सुप्रीटेंडेंट डॉक्टर विवेक दीवान के सहयोग से यह संभव हो पाया।














