• International
  • पाकिस्तान क्या सिर्फ अमेरिकी ‘गुलामी’ के लिए है? ट्रंप के बोर्ड ऑफ पीस पर फंसे शरीफ, बदलेंगे फैसला?

    इस्लामाबाद: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को स्विट्जरलैंड के दावोस से गाजा के लिए बोर्ड ऑफ पीस का ऐलान किया है। इसमें शामिल होने वाले शुरुआती देशों में पाकिस्तान का भी नाम है। पाकिस्तानी आर्मी के गाजा में प्रस्तावित इंटरनेशनल स्टेबिलाइजेशन फोर्स (ISF) में शामिल होने की भी चर्चा है। इससे पाकिस्तान में संदेश


    Azad Hind Desk अवतार
    By Azad Hind Desk जनवरी 23, 2026
    Views
    728 x 90 Advertisement
    728 x 90 Advertisement
    300 x 250 Advertisement
    इस्लामाबाद: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को स्विट्जरलैंड के दावोस से गाजा के लिए बोर्ड ऑफ पीस का ऐलान किया है। इसमें शामिल होने वाले शुरुआती देशों में पाकिस्तान का भी नाम है। पाकिस्तानी आर्मी के गाजा में प्रस्तावित इंटरनेशनल स्टेबिलाइजेशन फोर्स (ISF) में शामिल होने की भी चर्चा है। इससे पाकिस्तान में संदेश गया है कि शहबाज शरीफ और असीम मुनीर फिलिस्तीनियों को धोखा देकर इजरायल के साथ खड़े हैं। पाकिस्तान में इसकी आलोचना इतनी ज्यादा है कि ट्रंप के इस बोर्ड से बाहर होने तक पर बात होने लगी है। सवाल किया जा रहा है कि क्या दबाव इतना बढ़ सकता है कि पाकिस्तानी सरकार डोनाल्ड ट्रंप के बोर्ड से दूरी बना ले।

    फर्स्टपोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, डोनाल्ड ट्रंप के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने के लिए शहबाज शरीफ की पाकिस्तान के भीतर तीखी आलोचना हो रही है। विपक्षी नेताओं, विदेश नीति के एक्सपर्ट और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि पाकिस्तान ने वॉशिंगटन के साथ करीबी संबंध बनाने की कोशिश में आत्मघाती कदम उठा लिया है। इस्लामी संगठन भी इससे नाखुश दिख रहे हैं।

    पाकिस्तान में क्यों फूटा गुस्सा

    पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि उनको बोर्ड ऑफ पीस से उम्मीद है कि यह फिलिस्तीनियों के लिए मानवीय सहायता बढ़ाएगा और गाजा का तेजी से पुनर्निर्माण किया जाएगा। दूसरी ओर पाकिस्तानी एक्सपर्ट और शिक्षाविदों ने शहबाज शरीफ के इस कदम को अपारदर्शी और नैतिक रूप से अक्षम्य बताया है।

    सीनेट में विपक्ष के नेता अल्लामा राजा नासिर ने पाकिस्तान सरकार के फैसले की निंदा करते हुए इसे सिद्धांतिक रूप से गलत और नाकाबिल-ए-माफी कहा है। इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) ने तो साफतौर पर शरीफ से देश की भागीदारी इस बोर्ड से वापस लेने की मांग की है।

    एक्सपर्ट ने पूछे तीखे सवाल

    अमेरिकी, यूके और संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान की राजदूत रहीं मलीहा लोधी ने एक्स पर लिखा, ‘सरकार ने इस तथ्य को नजरअंदाज किया है कि ट्रंप बोर्ड के जरिए अपनी एकतरफा कार्रवाइयों के लिए अंतरराष्ट्रीय समर्थन और वैधता चाहते हैं। बोर्ड का दायरा बहुत व्यापक है और गाजा से परे है। यह इसमें शामिल ना होने की वजह बनती हैं।’

    लेखक और पत्रकार जाहिद हुसैन ने कहा, ‘पाकिस्तान ने यह जल्दबाजी में किया, हमें इंतजार करना चाहिए था। यह पाकिस्तान की विदेश नीति पर सीधा सवाल है। क्या हम सिर्फ ट्रंप के फरमान का पालन करने के लिए हैं। हमने सिर्फ ट्रंप के चहेते बनने के लिए यह किया है। हम नहीं देख रहे हैं कि ट्रंप किस तरह की नीति अपना रहे हैं।

    पाकिस्तान क्या वापस खीचेंगा कदम

    पाकिस्तान का ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होना शहबाज शरीफ और असीम मुनीर की ट्रंप प्रशासन को रिझाने की कोशिशों की कड़ी में नया कदम है। वह लंबे समय से यह कर रहे हैं। इन कोशिशों में ट्रंप को भारत से सीजफायर का श्रेय देने से लेकर उनके लिए नोबेल की मांग तक शामिल है।

    शहबाज शरीफ और असीम मुनीर के सत्ता चलाने के तानाशाही रुख और डोनाल्ड ट्रंप के अक्खड़ मिजाज को देखते हुए इस्लाबाद की बोर्ड ऑफ पीस से वापसी मुश्किल है। ऐसा कदम भी शरीफ की परेशानी बढ़ाएगा। साफ है कि ये मामला आसानी से शरीफ और मुनीर का पीछा नहीं छोड़ेगा।

    728 x 90 Advertisement
    728 x 90 Advertisement
    300 x 250 Advertisement

    हर महीने  ₹199 का सहयोग देकर आज़ाद हिन्द न्यूज़ को जीवंत रखें। जब हम आज़ाद हैं, तो हमारी आवाज़ भी मुक्त और बुलंद रहती है। साथी बनें और हमें आगे बढ़ने की ऊर्जा दें। सदस्यता के लिए “Support Us” बटन पर क्लिक करें।

    Support us

    ये आर्टिकल आपको कैसा लगा ? क्या आप अपनी कोई प्रतिक्रिया देना चाहेंगे ? आपका सुझाव और प्रतिक्रिया हमारे लिए महत्वपूर्ण है।