पिछले साल शेयर बाजार में काफी उतार-चढ़ाव देखा गया, लेकिन सोने की कीमतें लगातार बढ़ती रहीं। सोने ने 1979 के बाद अपना सबसे अच्छा सालाना प्रदर्शन किया। 2025 में सोने ने कई रिकॉर्ड तोड़े। इसकी वजह यह थी कि लोग सुरक्षित निवेश की तलाश में थे, अमेरिका में ब्याज दरें कम हुईं और डॉलर कमजोर हुआ। पिछले साल सोने की वैश्विक कीमतें 67% बढ़ीं और 26 दिसंबर को यह $4,549.7 प्रति औंस के रेकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया और अब यह 5000 डॉलर के करीब पहुंच चुका है।
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सोने का आकर्षण
भारत में सोने के प्रति लोगों का आकर्षण जगजाहिर है। मॉर्गन स्टेनली के अनुमान के मुताबिक भारतीय घरों में लगभग 34,600 टन सोना है, जिसकी कीमत करीब $3.8 ट्रिलियन है। यह अमेरिका, जर्मनी, इटली, फ्रांस, रूस और चीन के केंद्रीय बैंकों में जमा सोने के कुल भंडार से भी ज्यादा है। भारत की आबादी करीब 1.4 अरब है। इस हिसाब से हर व्यक्ति के पास लगभग 25 ग्राम सोना है, जिसकी कीमत मौजूदा भाव पर $3,250 से अधिक है। इससे पता चलता है कि भारतीय सोने की कीमतों में बदलाव के प्रति कितने संवेदनशील हैं।
यूनियन बजट आने में बस एक हफ्ता बाकी है और सोने की कीमतों के प्रति इस संवेदनशीलता के कारण सोने से जुड़े नीतिगत सुझावों पर ध्यान केंद्रित हो रहा है। सरकार ने जुलाई 2024 में सोने पर लगने वाली बेसिक कस्टम ड्यूटी को 15% से घटाकर 6% कर दिया था। इसके बाद, दुनिया के दूसरे सबसे बड़े सोने के खरीदार भारत में सोने की तस्करी के मामले कम हो गए थे। लेकिन कीमत में आई तेजी के बाद हाल के हफ्तों में तस्करी बढ़ गई है। एयरपोर्ट्स पर सोने की तस्करी की कई कोशिशों को नाकाम किया गया है।
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तस्करों का फायदा
सोने की कीमतें आसमान छू रही हैं, ऐसे में ग्रे मार्केट के ऑपरेटरों के लिए सोने की तस्करी करना बहुत फायदेमंद हो गया है। 6% कस्टम ड्यूटी और 3% सेल्स टैक्स से बचकर वे हर किलो सोने पर 11.5 लाख रुपये से अधिक का मुनाफा कमा रहे हैं। मुंबई के एक बुलियन डीलर ने बताया कि जैसे-जैसे सोने की कीमतें बढ़ रही हैं, तस्करों की कमाई भी बढ़ रही है।
CMS INDUSLAW में पार्टनर शशि मैथ्यूज ने कहा कि सोने पर ड्यूटी काफी समय से कम है। लेकिन इन उपायों के बावजूद भारतीय बंदरगाहों पर सोने की तस्करी के कई मामले सामने आ रहे हैं। इससे पता चलता है कि ये उपाय तस्करी को रोकने में नाकाम रहे हैं। तस्करी फिर से बढ़ रही है और उद्योग जगत से ड्यूटी को और घटाकर 3% करने की मांग तेज हो रही है।
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डिमांड और ड्यूटी
भारत में सोने की मांग कस्टम ड्यूटी में बदलाव से काफी गहराई से जुड़ी हुई है। ICRA की सीनियल वाइस-प्रेसिडेंट और को-ग्रुप हेड किंजल शाह ने को बताया कि जुलाई 2024 में कस्टम ड्यूटी में 9% कटौती से सोने की कीमतों में 5% की गिरावट आई थी और वित्त वर्ष 2025 की दूसरी तिमाही में सोने के आभूषणों की बिक्री में 10% की वृद्धि हुई थी। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने की कीमतों में लगातार तेजी ने इस प्रभाव को जल्दी ही खत्म कर दिया। इससे दूसरी छमाही में सोने की कीमत में 40% की वृद्धि हुई और सोने के आभूषणों की बिक्री 11% से अधिक गिर गई।
शाह ने कहा कि यदि ड्यूटी में और कटौती की जाती है तो कीमतों में मामूली कमी आ सकती है, लेकिन इसका प्रभाव अल्पकालिक रहने की आशंका है। उन्होंने कहा, ‘सोने की कीमतें केवल ड्यूटी में कटौती से कहीं अधिक अंतरराष्ट्रीय रुझानों से प्रभावित होंगी।’ उद्योग के कई विशेषज्ञों का कहना है कि बजट में सोने पर दरों में भारी कटौती की संभावना नहीं है।
मुंबई की मेहता इक्विटीज के कमोडिटीज के वाइस प्रेसिडेंट राहुल कालंतरी ने कहा कि बजट में सोने पर कस्टम ड्यूटी में बड़ी कटौती की उम्मीद नहीं है, खासकर जब चालू खाता घाटे पर बारीकी से नजर रखी जा रही है। ग्रांट थॉर्नटन इंडिया के पार्टनर और मेटल्स एंड माइनिंग इंडस्ट्री लीडर निलाद्री एन भट्टाचार्य ने कहा कि भारत के पास इस समय कटौती को कम करने की गुंजाइश नहीं हो सकती है। FY24 और FY25 के बीच भारत ने मात्रा के हिसाब से लगभग 5% कम सोना आयात किया, लेकिन ऊंची कीमतों के कारण मूल्य 25% से अधिक बढ़ गया। वहीं, सोने के आभूषणों का निर्यात केवल लगभग 20% बढ़ा।












