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  • EXCLUSIVE: टी20 वर्ल्ड कप बॉयकॉट करके बांग्लादेश का नया पैंतरा, ICC को पत्र लिखकर रखी मांग, पढ़ें 5 पॉइंट्स

    नई दिल्ली: बांग्लादेश ने खुद को टी20 वर्ल्ड कप 2026 से बाहर होने से बचाने के लिए एक नई कवायद शुरू की है। अपनी टीम भारत नहीं भेजने का फाइनल फैसला सुनाने के बाद बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) ने इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) को एक और पत्र लिखा है। ईमेल के जरिये भेजे गए इस


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    By Azad Hind Desk जनवरी 23, 2026
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    नई दिल्ली: बांग्लादेश ने खुद को टी20 वर्ल्ड कप 2026 से बाहर होने से बचाने के लिए एक नई कवायद शुरू की है। अपनी टीम भारत नहीं भेजने का फाइनल फैसला सुनाने के बाद बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) ने इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) को एक और पत्र लिखा है। ईमेल के जरिये भेजे गए इस पत्र में बीसीबी ने आईसीसी से अपने मैच भारत से श्रीलंका शिफ्ट करने की मांग पर एक स्वतंत्र विवाद निवारण कमेटी (DRC) बनाने की मांग की है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, इस कमेटी में स्वतंत्र वकीलों की मौजूदगी रहती है, जो आईसीसी से जुड़े कानूनी विवादों का हल निकालते हैं। बीसीबी को उम्मीद है कि आईसीसी उसकी मांग पर कार्रवाई करते हुए उसके मामले को डीआरसी को सौंपेगी।

    आइए आपको 5 पॉइंट्स में पूरा ताजा अपडेट समझाते हैं-

    1. क्या होती है विवाद निवारण कमेटी?

    आईसीसी विवाद निवारण कमेटी ( ICC Dispute Resolution Committee ) एक पूरी तरह स्वतंत्र मध्यस्थता विंग है, जो इंटरनेशनल क्रिकेट में होने वाले विवादों की सुनवाई करके उनका हल निकालता है। यह DRC उन मामले की सुनवाई करता है, जो आईसीसी, मेंबर देश, क्रिकेटर्स, क्रिकेट से जुड़े अधिकारी या अन्य संबंधित पक्ष से जुड़े होते हैं। इसमें सुनवाई तब की जाती है, जब आईसीसी के स्तर पर सारी आंतरिक उपाय नाकाम हो जाते हैं।

    2. यह कमेटी किस कानून के तहत काम करती है?

    DRC की पूरी प्रक्रिया ब्रिटिश कानून के तहत काम करती है और लंदन में स्थित कोर्ट के तहत ही इसकी सुनवाई होती है। डीआरसी की प्रक्रिया स्वतंत्र पैनलों के जरिये गोपनीय रूप से मध्यस्थता का काम करती है। डीआरसी का काम महज आईसीसी के निर्णयों, रेगुलेशस और कॉन्ट्रेक्ट्स की वैधता तय करना और इनकी व्याख्या का आकलन करना है। यह अपील फोरम के तौर पर काम नहीं करता है। डीआरसी के फैसले को अंतिम माना जाता है और इसे लागू करना ही होता है। इसके फैसले के खिलाफ बहुत सीमित मामलों में ही अपील की जा सकती है।

    3. बांग्लादेश ने भारत में खेलने से कर दिया है फाइनल इंकार

    बांग्लादेश ने गुरुवार को भारत में खेलने से अपना फाइनल इंकार सुना दिया था। बांग्लादेश सरकार के खेल सलाहकार आसिफ नजरूल ने कहा था कि भारत में खेलने के लिए नहीं जाने का निर्णय बदलने की कोई संभावना नहीं है और यह हमारी संप्रभुता का मामला है। उन्होंने मीडिया से कहा था कि आईसीसी ने बांग्लादेश के वेन्यू चेंज करने के आग्रह को नहीं माना है इसका साफ मतलब है कि बांग्लादेश इस साल टी20 वर्ल्ड कप में भाग नहीं लेगा। भारत में खेलने पर हमारे लोगों की सुरक्षा को खतरा टला नहीं है। यह चिंता महज काल्पनिक विश्लेषण या अनुमानों पर आधारित नहीं है। यह एक असल घटना के कारण सामने आई है। हमारे बेस्ट खिलाड़ी को कट्टरपंथियों के सामने घुटने टेकने के लिए मजबूर किया गया है। भारतीय क्रिकेट बोर्ड ने उसे भारत से स्पष्ट रूप से भगाया है।

    4. आईसीसी खारिज कर चुकी है बांग्लादेश की मांग

    बांग्लादेश ने भारत में अपने खिलाड़ियों और फैंस की सुरक्षा को खतरा होने का मुद्दा बना रखा है। भारत में बांग्लादेश विरोधी माहौल होने की बात कहकर उसने आईसीसी से अपने मैच श्रीलंका शिफ्ट करने की मांग की थी। आईसीसी ने करीब तीन सप्ताह तक बांग्लादेश को समझाने की कोशिश की। इसके बाद आईसीसी बोर्ड में सभी मेंबर्स ने इस मुद्दे पर वोट किया था, जिसमें बांग्लादेश और पाकिस्तान को छोड़कर बाकी 14 देशों ने मैच शिफ्ट करने के खिलाफ वोट डाला था। इसके बाद आईसीसी ने बांग्लादेश को अपना फैसला लेने का आदेश दिया था और उसे 48 घंटे का समय दिया था। इससे पहले ही बांग्लादेश ने अपना फैसला सुना दिया है।

    5. इस पूरे विवाद के पीछे क्या है मामला?

    बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष अमीनुल इस्लाम बुलबुल ने इस पूरे मामले के पीछे का कारण भी जाहिर किया है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेशी तेज गेंदबाज मुस्तफिजुर रहमान को आईपीएल टीम से सुरक्षा का खतरा बताकर निष्कासित किया गया है, जिसने बांग्लादेश को भारत नहीं जाने का कठोर निर्णय लेने पर मजबूर किया है। बुलबुल ने कहा था कि मुस्तफिजुर ना तो चोटिल था और ना ही उसने आईपीएल से नाम वापस लिया था। बीसीबी ने उसकी एनओसी भी वापस नहीं ली थी। उसे सुरक्षा का खतरा बताकर निष्कासित किया गया है। बीसीबी ने मुस्तफिजुर को निष्कासित करने के अगले दिन यानी 4 जनवरी को आईसीसी से संपर्क किया था और अपने मैच शिफ्ट करने की मांग रखी थी।

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