अरब देशों से विचार कर सकता है भारत
ET की एक रिपोर्ट के अनुसार सऊदी अरब, मोरक्को, मिस्र, कतर, बहरीन और संयुक्त अरब अमीरात (UAR) ने ट्रंप की अगुवाई वाले बोर्ड में शामिल होने का फैसला किया है और भारत अपना फैसला करने से पहले इनकी राय भी जानने को इच्छुक है। खास बात ये है कि भारत और संयुक्त अरब अमीरात ने हाल ही में एक बहुत बड़ी व्यापारिक और रक्षा क्षेत्र से जुड़ी डील की है और खाड़ी का यह देश तुर्की और पाकिस्तान की जुगलबंदी के बीच हमारे काफी करीब आ रहा है।
फरवरी में इजरायल, अरब जा सकते हैं मोदी
बात यहीं तक सीमित नहीं है। ऐसी अटकलें लग रही है कि अरब देशों के विदेश मंत्रियों की भारत में होने वाली बैठक के बाद प्रधानमंत्री मोदी फरवरी में इजरायल और किसी अरब देश की यात्रा पर भी जा सकते हैं। Azad Hind की रिपोर्ट के अनुसार इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की ओर से पीएम मोदी को इजारयल आने का निमंत्रण मिलने की जानकारी है। वैसे सरकारी सूत्रों का कहना है कि इसपर अभी तक कुछ भी फाइनल नहीं हुई है। निश्चित तौर पर अगर पीएम मोदी इजरायल और अरब देश की यात्रा पर गए तो वहां भी ट्रंप का प्रस्ताव बातचीत का एक अहम एजेंडा हो सकता है।
ट्रंप के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में जुटने वाले देश
ट्रंप ने गुरुवार को स्विट्जरलैंड के दावोस में जब ‘बोर्ड ऑफ पीस’ के चार्चटर हस्ताक्षर के लिए वैश्विक नेताओं को जुटाया तो उसमें कुछ अरब और मुस्लिम देशों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए। इस दौरान ट्रंप के साथ दिखाई देने वाले देशों में तुर्की,कतर,पाकिस्तान, अर्जेंटीना, हंगरी, बुल्गारिया, बहरीन, कजाकिस्तान, कोसोवो, अर्मेनिया, अजरबैजान, मोरक्को और पराग्वे के प्रतिनिधि शामिल थे। यहां पर पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ अपने फील्ड मार्शल असीम मुनीर को भी लेकर पहुंचे हुए थे।
ट्रंप की सोच से आगे है भारत की तैयारी
‘बोर्ड ऑफ पीस’ को लेकर ट्रंप जिस तरह का मंसूबा दिखा रहे हैं, उससे यह भी आशंका पैदा हो रही है कि वे संयुक्त राष्ट्र(UN) के समानांतर एक अंतरराष्ट्रीय संगठन खड़ा कर रहे हैं। हालांकि, वह दावा कर रहे हैं कि उनका बोर्ड संयुक्त राष्ट्र के साथ-साथ काम करेगा, लेकिन भविष्य में यह क्या करवट लेगा, इसका अंदाजा लगाना बहुत मुश्किल है। क्योंकि, एक तरफ वह शांति की बात कर रहे हैं, दूसरी तरफ इसके तुरंत बाद ईरान को लेकर बहुत ही खौफनाक इरादा जता रहे हैं। ऐसा लग रहा ही कि ईरान पर अमेरिका कभी भी हमला कर सकता है। यही वजह है कि भारत ने ट्रंप के प्रस्ताव पर अभी तक जल्दीबाजी नहीं दिखाई है और किसी भी नतीजे पर पहुंचने से पहले सभी स्टेकहोल्डर्स को भरोसे में लेना चाहता है।













