• Technology
  • 6G लॉन्‍च से पहले बड़ी छलांग, अमेरिकी इंजीन‍ियरों ने बनाई 100 गुना तेज वायरलैस चिप जो देगी फाइबर केबल जितनी स्‍पीड

    भविष्‍य में डेटा को वायरलैस तरीके से एक जगह से दूसरी जगह भेजना इतना फास्‍ट हो जाएगा, जिसकी हम अभी कल्‍पना कर रहे हैं। 6G लॉन्‍च से पहले अमेरिकी इलेक्‍ट्र‍िकल इंजीनियरों को बड़ी कामयाबी मिली है। उन्‍होंने एक ऐसा सिलिकॉन चिप वायरलैस ट्रांसमीटर बनाया है जो फाइबर ऑप्टिक केबल की स्‍पीड से डेटा को भेज


    Azad Hind Desk अवतार
    By Azad Hind Desk जनवरी 24, 2026
    Views
    728 x 90 Advertisement
    728 x 90 Advertisement
    300 x 250 Advertisement
    भविष्‍य में डेटा को वायरलैस तरीके से एक जगह से दूसरी जगह भेजना इतना फास्‍ट हो जाएगा, जिसकी हम अभी कल्‍पना कर रहे हैं। 6G लॉन्‍च से पहले अमेरिकी इलेक्‍ट्र‍िकल इंजीनियरों को बड़ी कामयाबी मिली है। उन्‍होंने एक ऐसा सिलिकॉन चिप वायरलैस ट्रांसमीटर बनाया है जो फाइबर ऑप्टिक केबल की स्‍पीड से डेटा को भेज सकता है। दावा है कि इस काम में बहुत कम बिजली खर्च होती है और भविष्‍य में एडवांस्‍ड ट्रांसमिशन प्रोटोकॉल के लिए नए दरवाजे भी खुलते हैं। आसान भाषा में समझाएं तो मौजूदा समय में डेटा को तेजी से भेजने में फाइबर केबलों का इस्‍तेमाल होता है, भविष्‍य में यही स्‍पीड वायरलैस मिलेगी। यानी आप दुनिया के किसी कोने से भी हाईस्‍पीड डेटा भेज पाएंगे और रिसीव कर पाएंगे।

    किसे हासिल हुई यह कामयाबी?

    यह कामयाबी कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी, UC Irvine के इलेक्‍ट्र‍िकल इंजीनियरों को मिली है। पेम हेदारी और उनकी टीम वायरलैस चिप बनाने में साल 2020 से काम कर रहे थे। हेदारी UC Irvine में इलेक्‍ट्र‍िकल इंजीन‍ियर‍िंग और कंप्‍यूटर साइंस के प्रोफेसर हैं। रिपोर्ट के अनुसार, रिसर्च टीम को यह पता था कि मौजूदा वायरलैस चिप एक वक्‍त के बाद काम करना बंद कर देंगी, क्‍योंकि वो बहुत हाईस्‍पीड डेटा ट्रांस‍मिट नहीं कर सकतीं।

    कैसे हासिल हुई उपलब्‍ध‍ि?

    गौरतलब है कि जब भी वायरलैस स्‍पीड में बढ़ोतरी होती है, डेटा को प्रोसेस करने में लगने वाली एनर्जी भी बढ़ती है। अगर आज की तकनीक को ही भविष्‍य के ट्रांसमीटरों के लिए इस्‍तेमाल किया जाए तो रिसर्चर्स को बहुत बड़ी बैटरी बनानी होगी या मौजूदा बैटरी फौरन डिस्‍चार्ज हो जाएगी। पेम हेदारी और उनकी टीम को पता था कि किसी भी चिप को बनाने में जो सर्किट इस्‍तेमाल होता है, उसे भविष्‍य के लिए पूरी तरह से बदलना होगा।

    रिसर्चर्स ने क्‍या बड़ा किया?

    मौजूदा वायरलैस चिप के ट्रांसमीटर, डिजिटल टु एनालॉग कन्‍वर्टर का इस्‍तेमाल करते हैं। लेकिन 6G के लिए यह काफी नहीं है। 6G के लिए ट्रांसमीटरों को 100 गीगाहर्त्‍ज से अधि‍क फ्रीक्‍वेंसी पर काम करना होगा। रिसर्चर्स इसे DAC ब्‍लॉक कहते हैं। पेम हेदारी की टीम ने DAC को खत्‍म कर दिया और सीधे र‍ेड‍ियो-फ्रीक्‍वेंसी में सिग्‍नल बनाना शुरू किया। इससे जो चिप बनी वह बिना गर्म हुए फास्‍ट और अधिक डेटा को एक जगह से दूसरी जगह भेज सकती है। रिसर्चर्स ने स्‍मार्ट रिसीवर भी बनाया है ताकि स्‍मार्टफोन जैसी डिवाइसेज को फास्‍ट डेटा भेजने में सक्षम बनाया जा सके और 6G जैसी तकनीक के लिए वो तैयार हो सकें। हेदारी और उनकी टीम ने जिस चिप को तैयार किया है, वह बहुत कम बिजली खाती है और भविष्‍य में बड़े पैमाने पर तैयार किए जाने के लिए भी आइ‍ड‍ियल है।

    728 x 90 Advertisement
    728 x 90 Advertisement
    300 x 250 Advertisement

    हर महीने  ₹199 का सहयोग देकर आज़ाद हिन्द न्यूज़ को जीवंत रखें। जब हम आज़ाद हैं, तो हमारी आवाज़ भी मुक्त और बुलंद रहती है। साथी बनें और हमें आगे बढ़ने की ऊर्जा दें। सदस्यता के लिए “Support Us” बटन पर क्लिक करें।

    Support us

    ये आर्टिकल आपको कैसा लगा ? क्या आप अपनी कोई प्रतिक्रिया देना चाहेंगे ? आपका सुझाव और प्रतिक्रिया हमारे लिए महत्वपूर्ण है।