दक्षिण मुंबई की पॉश हाउसिंग सोसायटी जॉली मेकर (Jolly Maker) टावर अपने फ्लैट मालिकों को सालाना करीब 2.5 लाख रुपये का पेमेंट करती। इस अनोखी व्यवस्था को लेकर हाल ही में पेटीएम के संस्थापक विजय शेखर शर्मा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो शेयर किया है। यह वीडियो काफी वायरल हो गया है। इस वीडियो को 75 हजार से ज्यादा लोग देख चुके हैं।
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मेंटेनेंस चार्ज शब्द ही नहीं है यहां
मुंबई में आमतौर पर कफ परेड, नरीमन पॉइंट जैसे इलाकों में रहने का मतलब है हजारों रुपये का मासिक मेंटेनेंस। लेकिन जॉली मेकर टावर में यह शब्द मानो शब्दकोश से ही गायब है। यहां रहने वाले लोगों को न केवल मेंटेनेंस से पूरी राहत है, बल्कि साल के अंत में उन्हें मोटा ‘डिविडेंड’ भी मिलता है।
कैसे हुआ यह सब?
इस अनोखे मॉडल की कहानी 1970 के दशक से शुरू होती है। जब जॉली मेकर के बिल्डर ने फ्लैट बेचने शुरू किए, तो खरीदारों के सामने एक खास शर्त रखी गई। फ्लैट खरीदने के साथ-साथ उन्हें नरीमन पॉइंट स्थित बिल्डर की एक कमर्शियल बिल्डिंग में भी हिस्सेदारी लेनी थी। उस समय यह शर्त लोगों को अतिरिक्त बोझ लग सकती थी, लेकिन आज वही फैसला फायदे का सौदा साबित हुआ है।
किराए से चलती है पूरी सोसायटी
नरीमन पॉइंट की उस कमर्शियल बिल्डिंग से आज करीब 50 लाख रुपये महीना किराया आता है। यह पूरी रकम जॉली मेकर सोसायटी के फंड में जाती है। इसी पैसे से बिल्डिंग की सुरक्षा, साफ-सफाई, लिफ्ट, स्टाफ और अन्य सभी मेंटेनेंस खर्च पूरे किए जाते हैं। खर्चों के बाद जो रकम बचती है, उसे सोसायटी के सदस्यों में बांट दिया जाता है।
घर नहीं, कमाई करने वाला निवेश
जॉली मेकर टावर में रहना सिर्फ एक घर का मालिक होना नहीं है, बल्कि एक मजबूत बिजनेस मॉडल का हिस्सा बनना है। यहां के फ्लैट मालिकों को सालाना करीब 2.5 लाख रुपये की अतिरिक्त इनकम होती है। यानी यह घर न सिर्फ रहने की जगह है, बल्कि हर साल कमाई करने वाला निवेश भी।














