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  • भैरव, रुद्र, शक्तिबाण और दिव्यास्त्र… भारतीय सेना का नया अवतार, क्या है इन 7 नामों के पीछे का खास मतलब?

    वक्त के साथ युद्ध का स्वरूप बदल रहा है और युद्ध के तरीके भी। ड्रोन, स्वॉर्म टेक्नॉलजी, साइबर और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर ने लड़ाई के मायने बदल दिए हैं। ऐसे में भारतीय सेना भी खुद को उसी अवतार में ढाल रही है। पिछले कुछ महीनों में सेना के भीतर जो बदलाव हुए हैं वे सिर्फ सांगठनिक


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    By Azad Hind Desk जनवरी 25, 2026
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    वक्त के साथ युद्ध का स्वरूप बदल रहा है और युद्ध के तरीके भी। ड्रोन, स्वॉर्म टेक्नॉलजी, साइबर और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर ने लड़ाई के मायने बदल दिए हैं। ऐसे में भारतीय सेना भी खुद को उसी अवतार में ढाल रही है। पिछले कुछ महीनों में सेना के भीतर जो बदलाव हुए हैं वे सिर्फ सांगठनिक ढांचे के तौर पर ही नहीं बल्कि रणनीतिक और सोच के स्तर पर भी बडे बदलाव है। भैरव, रुद्र, अश्नि, शक्तिबाण और दिव्यास्त्र, ये सिर्फ प्रतीकात्मक नाम नहीं है बल्कि भारतीय सेना के उस नए, ज्यादा घातक रूप की पहचान है जो आने वाले वक्त की चुनौतियों के लिए तैयार हो रहा है। पढ़ें, पूनम पाण्डे की स्पेशल रिपोर्ट…

    भारतीय सेना में बड़े पैमाने पर पुनर्गठन का काम जारी है। जहां एक तरफ तीनों सेनाओं के बीच जुड़ाव को मजबूत किया जा रहा है, वहीं सेना के भीतर अलग-अलग आर्म्स इनफ्रेंट्री, आर्टिलरी, एयर डिफेस, सिग्नल के बीच भी तालमेल और एकीकरण पर जोर दिया जा रहा है। कुछ दिन पहले ही भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने बताया था कि पिछले 14-15 महीनों में ही संगठनात्मक बदलावी के लिए सरकार की ओर से 31 सैक्शन लेटर जारी किए गए है। इनमें इंटिग्रेटिड बैटल ग्रुप (IBG) और एविएशन ब्रिगेड जैसे अहम फैसले भी शामिल है।

    सेना में स्पेशल फोर्स और घातक के बीच अब ‘भैरव’

    भारतीय सेना ने दुनियाभर में जारी संघर्षों से सीख लेते हुए खुद को ज्यादा मजबूत बनाने की दिशा में काम शुरू किया है। सेना में स्पेशल फोर्स और घातक तो पहले से है, अब इनके बीच गैप खत्म करने के लिए नई लाइट कॉम्बेट बटालियन ‘भैरव’ बनाई जा रही है। अब तक 13 भैरव बटालियन बन गई है और 12 बननी बाकी है। घातक टीम अभी सेना की हर इन्फेंट्री बटालियन में है। इनका स्पेशल टास्क होता है जैसे दुश्मन के बंकर उड़ाना, दुश्मन को आगे बढ़ने से रोकना, दुश्मन के रास्ते में बाधा डालना, ताकि उन तक सप्लाई ना पहुंच पाए या दुश्मन के निगरानी के सिस्टम को बेकार करना।

    यही काम स्पेशल फोर्स भी करती है, लेकिन दुश्मन के इलाके में जाकर। स्पेशल फोर्स हवा के जरिए, जंगलो के रास्ते, अंडर वॉटर किसी भी तरह से दुश्मन के इलाके में घुसने के लिए ट्रेंड होती है। स्पेशल फोर्स स्ट्रैटजिक स्तर की फोर्स है। सेना के किसी कमांड या कोर में स्पेशल फोर्स की एक या दो बटालियन होती है। लेकिन जिस तरह मल्टिडोमेन ऑपरेशन बढ़े है उससे स्पेशल फोर्स जैसी और फोर्स की जरूरत महसूस हुई। इसलिए भैरव बनाई जा रही है।

    ये स्वतंत्र तौर पर कोई बड़ा टास्क पूरा कर सकते हैं। इसमें पैदल सेना के अलावा, आर्टिलरी, एयर डिफेंस, सिग्नल के भी सैनिक है। इसमें कॉम्बेट और कॉम्बेट सपोर्ट सब एक साथ है। तोप की ताकत है तो फायर सपोर्ट भी है। लॉइटरिंग एम्युनिशन, ड्रोन और साथ ही एयर डिफेस को भी ताकत है। पारंपरिक लड़ाई में जिस भी चीज की जरूरत होती है वह सब एक साथ भैरव बटालियन में है। इसके सैनिक स्पेशली ट्रेंड है और एयर बॉर्न ऑपरेशन से लेकर अंडर वॉटर ऑपरेशस तक कर सकते है। इनका काम क्रॉस बॉर्डर ऑपरेशस, दुश्मन की जानकारी जुटाना और उसकी गतिविधियों में बाधा डालना होगा।

    ताकत यानी रुद्र ब्रिगेड

    भारतीय सेना में बटालियन से ऊपर की इकाई है ब्रिगेड। सेना में 7 रुद्र ब्रिगेड भी बनाई जा रही है, जिनमें से दो रुद्र ब्रिगेड तैयार हो गई है। अभी इन्फेट्री की ब्रिगेड में इन्फेंट्री की यूनिट, इसी तरह आर्टिलरी की ब्रिगेड में आर्टिलरी यूनिट होती है। रुद्र ब्रिगेड में इन्फेंट्री के साथ ही आर्टिलरी, जरूरत के हिसाब से आई या दूसरी आर्म यूनिट है।

    अश्नि प्लाटून: ड्रोन पावर भारतीय सेना की हर पैदल सैना बटालियन में अश्नि (वज्र) प्लाटून बना दी गई है। ये ड्रोन प्लाटून है यानी सभी बटालियन के पास अब ड्रोन भी है और उन्हें चलाने वाले सैनिक भी। जरूरत के हिसाब से सैनिकों को ट्रेनिंग भी दी जा रही है।

    इंटिग्रेटिड बैटल ग्रुप

    सेना में ब्रिगेड के साइज से बड़े लेकिन डिविजन से छोटे इंटिग्रेटिड बैटल ग्रुप भी बनाए जा रहे है। अभी 4 इंटिग्रेटिड बैटल ग्रुप (IBG) बनाए जा रहे है। एक IBG पाकिस्तान बॉर्डर पर भी फोकस करेगा। इंटिग्रेटिड बैटल ग्रुप में करीब 5000 से 7000 सैनिक होंगे। सामान्य ब्रिगेड में करीब 3000 हजार और एक डिवीजन में करीब 10 हजार सैनिक होते है। मेजर जनरल रैक के अधिकारी IBG के मुखिया होंगे। इसमें भी पैदल सैनिक, टैक, तोप, एयर डिफेंस, इंजीनियर, सिग्नल, लॉजिस्टिक सभी शामिल होंगे।

    शक्तिबाण और दिव्यास्त्र

    पारंपरिक आर्टिलरी रेजिमेंट में से कुछ रेजिमेंट को शक्तिबाण रेजिमेंट में तब्दील किया जा रहा है। आर्टिलरी (तोपखाना) में 15 शक्तिबाण रेजिमेंट बनाई जा चुकी है और 11 बनाई जानी है। जहा पारंपरिक आर्टिलरी रेजिमेंट में तोप होती है, वहीं शक्तिबाण रेजिमेंट में ड्रोन, स्वॉर्म ड्रोन और लॉइटरिंग एम्युनिशन है। सेना प्रमुख जनरल उपेद्र द्विवेदी ने कहा कि शक्तिबाण रेजिमेंट की रेंज शुरुआत में 100 से 400 किलोमीटर तक होगी, फिर इसे 700 से 1000 किलोमीटर तक किया जाएगा। जो तोपखाना रेजिमेंट शक्तिबाण में तब्दील नहीं होगी उनमें दिव्यास्त्र बैटरी होगी। शुरू में 34 दिव्यास्त्र बैटरी बनाई जा रही है। दिव्यास्त्र बैटरी के पास ड्रोन और लॉइटरिंग एम्युनिशन होगे।

    हर नाम का है खास मतलब

    त्रिनेत्र: त्रिनेत्र एक मैन-पोर्टबल बिजली से चलने कला फिक्स्ड विंग UVA जिसे सटीक हमला करने और सतत निगरानी के लिए बनाया गया है।

    अमोघ: अमोघ भारतीय सेना का 155mm, 52 कैलिबर जाला एक स्वदेशी एडवांस्टड टोड आर्टिलरी गन सिस्टम है। यह लंबी दूरी और उच्च सटीक मारक समता प्रदान करता है।

    सूर्यास्त्र: सूर्यास्त्र यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम है। यह हाई स्पीड है और कई तरह के वॉरहेड का इस्तेमाल इसमें हो सकता है।

    अग्निबाण: यह मल्टिबैरल रकिट लॉन्चर सिस्टम है। BM-21 अग्निबाण में 40 ट्यूब के साथ रॉकेट्स दागे जाते हैं।

    बजरंग: यह लाइट स्पेशलिस्ट बीइकल है। यह वाहन बेहतरीन मोबिलिटी, सुरक्षा और ऑपरेशनल क्षमता के लिए बनाया गया है।

    संजय: बैटल फील्ड सर्विलांस सिस्टम का नाम है संजय। यह महाभारत के संजय की तरह ही सेना की आंख है।

    वीर: वीर भारत में ही बना स्वदेशी इलेक्ट्रिक ऑल टेरेन वेइकल है। यह बिना शोर किए काम करने और तेजी से आवाजाही करने में सक्षम है। वह गश्त टोही सटीक कार्रवाई जैसे मिशन में मदद करता है।

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