कॉन्फ्रेंस खत्म होने के बाद बांग्लादेश सेना प्रमुख जनरल वकार-उज-जमान रंगपुर में स्थित 66वीं इंफैंट्री डिवीजन के दौरे पर जाएंगे। उनके साथ कम से कम एक लेफ्टिनेंट जनरल और चार ब्रिगेडियर होंगे। नॉर्थ ईस्ट न्यूज ने बताया है कि 5 जनवरी को एक आठ पेज का दस्तावेज सेना के टॉप जनरलों के बीच सर्कुलेट किया गया था। इन अधिकारियों में सेना प्रमुख जनरल वकार उज जमान, सशस्त्र रक्षा बलों के प्रिंसिपल स्टाफ अफसर लेफ्टिनेंट जनरल एसएम कमरुल हसन, नेशनल डिफेंस कॉलेज कमांडेंट लेफ्टिनेंट जनरल मोहम्मद शाहिनुल हक, लेफ्टिनेंट जनरल मैनूर रहमान और कई मेजर जनरल शामिल हैं।
भारत में ट्रेनिंग के लिए नहीं भेजेंगे कैडेट
नॉर्थ ईस्ट ने इन दस्तावेजों को देखने का दावा किया है और बताया कि इससे पता चलता है कि शीर्ष सैन्य अधिकारी जिम्मेदाी के अलग-अलग क्षेत्रों से जुडडे अहम मुद्दों पर प्रोग्रेस रिपोर्ट पर सोच-समझकर विचार करेंगे। रिपोर्ट के अनुसार, कॉन्फ्रेंस के एजेंडे में सबसे महत्वपूर्ण चीज भारत, पाकिस्तान, ब्रिटेन, अमेरिका और चीन जैसे देश में चीन वगैरह में ट्रेनिंग के लिए अफसर कैडेट्स को भेजने से जुड़े एक प्रपोजल की स्थिति पर चर्चा थी।
बांग्लादेश की सेना भारत और रूस से संबंधों को कमजोर करने पर काम कर रही है। रिपोर्ट के अनुसार बांग्लादेश की सेना अब भारत और रूस में अफसर कैटेड को भेजने का फैसला द्विपक्षीय और सैन्य संबंधों और दी गई वित्तीय शर्तों और नियमों के आधार पर करेगी। कॉन्फ्रेंस के दौरान इसके फाइनल होने की उम्मीद है। अब तक बांग्लादेश की सेना के लिए व्यापक ट्रेनिंग और नियमित रूप से ऑफिसर भेजने के लिए भारतीय और रूसी मिलिट्री एकेडमी पसंदीदा जगह थी।
भारत के साथ रक्षा संंबंधों पर असर
बांग्लादेश के रक्षा सूत्रों का कहना है कि इस फैसला का असर निश्चित रूप से एक तरफ ढाका और मॉस्को और दूसरी तरफ ढाका और नई दिल्ली के बीच सैन्य सहयोग पर असर पड़ेगा। सेना प्रमुख वकार-उज-जमान इन सभी अहम और संभावित रूप से विवादास्पद फैसले पर बोलेंगे, जिसमें सशस्त्र रक्षा बलों की एक नई पैरा कमांडो ब्रिगेड और दो पैरा कमांडो बटालियन बनाने के प्रस्ताव पर चर्चा शामिल है। इस प्रस्ताव को 11 नवम्बर 2025 को सार्वजनिक प्रशासन मंत्रालय और वित्त मंत्रालय से आगे की मंजूरी के लिए भेजा गया था। इसके बाद रक्षा मंत्रालय ने प्रस्ताव को यूनुस से आवश्यक मंजूरी के लिए आगे के लिए भेजा।













