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  • अमेरिका का Pax Silica, भारत के लिए मौका, लेकिन राष्ट्र हित के लिए बड़ी चुनौती क्यों है

    नई दिल्ली: अमेरिका ने भारत को अपनी पैक्स सिलिका ( Pax Silica ) पहल में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। इस पहल का मकसद क्रिटिकल मिनरल्स और सेमीकंडक्टर से जुड़े मामलों में सप्लाई चेन को दुरुस्त रखना है, ताकि आधुनिक मैन्युफैक्टरिंग में किसी तरह की रुकावट पैदा न हो। भारत ने अभी तक इस


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    By Azad Hind Desk जनवरी 26, 2026
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    नई दिल्ली: अमेरिका ने भारत को अपनी पैक्स सिलिका ( Pax Silica ) पहल में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। इस पहल का मकसद क्रिटिकल मिनरल्स और सेमीकंडक्टर से जुड़े मामलों में सप्लाई चेन को दुरुस्त रखना है, ताकि आधुनिक मैन्युफैक्टरिंग में किसी तरह की रुकावट पैदा न हो। भारत ने अभी तक इस पर अपना कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया है और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की इस पहल का हिस्सा बनने से पहले इसके सभी गुण-दोष पर विचार कर लेना चाहता है।

    क्रिटिकल मिनरल्स सप्लाई चेन के लिए जरूरी

    ET की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत इस नई अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था का हिस्सा तो बनना चाहता है, लेकिन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे विषयों से जुड़ी नीतियों को लेकर थोड़ा सावधान है, जिसमें उसे अपने मनचाहे तरीके से आगे बढ़ने में अड़ंगा लग सकता है। इस पहल की सबसे बड़ी विशेषता है, इसमें कच्चे माल की सप्लाई चेन तो बेहतर होनी तय है, जो कि मॉडर्न इंडस्ट्री की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

    चीन पर निर्भरता कम करने का बड़ा मौका

    पैक्स सिलिका में शामिल देशों ने सेमीकंडक्टर डिजाइन, इसे बनाने, पैकेजिंग, लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्ट लेकर कंप्यूटिंग, ऊर्जा ग्रिड और बिजली उत्पादन में आने वाली चुनौतियों से साथ मिलकर निपटने और अवसरों का लाभ उठाने का वादा किया है। इनका लक्ष्य ये है कि संवेदनशील टेक्नोलॉजी और क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में कोई देश नाजायज फायदा न उठा सके। इशारा चीन की तरफ है। अकेले भारत अपना करीब 30% ‘चिप’ वहीं से मंगवाता है। पैक्स सिलिका में शामिल होने का मतलब, भारत को भी इसका फायदा मिल सकता है।

    पैक्स सिलिका के पहले दौर से बाहर रहा भारत

    भारत को यह भी देखना है कि चीन को वह अचानक इस मामले में पूरी तरह से नजरअंदाज नहीं कर सकता। अमेरिका के साथ पैक्स सिलिका को लेकर औपचारिक बातचीत अभी होनी है। उससे पहले कई ऐसी बातें हैं, जिसका पहले से अध्ययन कर लेना बहुत जरूरी है। कुछ अधिकारी इस बात की ओर भी ध्यान दिला रहे हैं कि भारत इसमें शामिल होने का निमंत्रण देर से दिया गया है। जबकि, जापान सिंगापुर, दक्षिण कोरिया, यूके, ऑस्ट्रेलिया, इजरायल और ग्रीस ने 12 दिसंबर को ही पैक्स सिलिका पर शिखर सम्मेलन के दौरान घोषणापत्र पर हस्ताक्षर कर दिए थे। बाद में नीदरलैंड्स, संयुक्त राष्ट्र अमीरात और कतर भी इसका हिस्सा बन गए।

    भारत के नाम पर अमेरिका ने बाद में किया विचार

    वहीं भारत तक बुलावे का संदेश आते-आते एक महीना लग गया। 12 जनवरी को भारत आने से पहले अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने एलान किया कि भारत को भी इसका निमंत्रण मिलेगा। यही नहीं ग्लोबल सेमीकंडक्टर के लिए मायने रखने वाले कुछ और ग्लोबल लीडर भी इसमें अभी तक शामिल नहीं हुए हैं। जैसे कि ताइवान ने अभी तक इसका हिस्सा बनने की औपचारिक घोषणा नहीं की है। इसी तरह यूरोपियन यूनियन (EU) पहले शिखर सम्मेलन में शामिल तो हुआ, लेकिन उसकी भूमिका अतिथि से ज्यादा नहीं रही। इसकी अपनी औद्योगिक नीति भी है।

    पैक्स सिलिका राष्ट्र हित के लिए बड़ी चुनौती क्यों है

    मंगलवार को भारत और यूरोपियन यूनियन में मुक्त व्यापार संधि (FTA) पर लेकर हुई बातचीत को लेकर बहुत बड़ी घोषणा होने वाली है। भारत और यूरोप के 27 देश कई क्षेत्रों में मिलकर काम करने की योजना का एलान करने वाले हैं, ऐसे में भारत आगे कोई निर्णय लेने से पहले इसपर भी विचार जरूर करेगा। क्योंकि, भारत के लिए क्रिटिकल मिनरल्स और सेमीकंडक्टर का निर्बाध सप्लाई चेन जितना जरूरी है, उससे कम जरूरी यह भी नहीं कि उसे किसी अंतरराष्ट्रीय संधि का हिस्सा बनकर अपनी स्वतंत्र नीति में किसी तरह का समझौता न करना पड़े।

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