वंदे मातरम बजाने का निर्णय प्रशंसनीय
कार्यक्रम के दौरान होसबाले ने सरकार की सराहना करते हुए कहा कि गणतंत्र दिवस परेड के दौरान ‘वन्दे मातरम्’ बजाने का निर्णय प्रशंसनीय है। उन्होंने कहा, ‘यह हमारा राष्ट्रीय गीत है। स्वाभाविक रूप से, जो लोग भारत के स्वतंत्रता संग्राम का नेतृत्व कर रहे थे, उन्हें वन्दे मातरम् से प्रेरणा मिली और वे आगे बढ़े।’
उन्होंने कहा कि इसलिए, वन्दे मातरम् की हर पंक्ति, हर शब्द हर भारतीय पीढ़ी के लिए देश के प्रति काम करने की प्रेरणा है। यही कारण है कि इस विशेष परेड के दौरान इसे सभी को याद दिलाने का सरकार का निर्णय सराहनीय है। उन्होंने लोगों से समाज के प्रति प्रेम एवं करुणा तथा कमजोर वर्ग के लोगों के प्रति स्नेह एवं सहानुभूति विकसित करने और भारत की रक्षा के लिए उनकी सेवा में स्वयं को समर्पित करने की अपील की।
जीवंत गणराज्य के नागरिक के रूप में गर्व
होसबाले ने यहां केशव कुंज में गणतंत्र दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में कहा, ‘‘हम भारतीय अत्यंत प्रसन्न हैं, क्योंकि हम अपने गौरवशाली और जीवंत गणराज्य के नागरिक के रूप में गर्व के साथ रह रहे हैं। यह दिन हमारे लिए अत्यंत पवित्र है। उन्होंने कहा कि आज का दिन भारत के राष्ट्रध्वज, संवैधानिक मूल्यों और देश के प्राचीन एवं शाश्वत आध्यात्मिक सार की निरंतर रक्षा एवं संवर्धन की हमारी प्रतिबद्धता को दोहराने का दिन है।
होसबाले ने कहा कि संविधान और तिरंगे की रक्षा करना राष्ट्रीय कर्तव्य है, क्योंकि इनकी नींव सत्य और धर्म पर आधारित है। उन्होंने कहा कि आज हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि हम अपने जीवन में भारत के शाश्वत आध्यात्मिक आदर्शों को अपनाकर अपने राष्ट्रीय कर्तव्यों का निर्वहन करेंगे। अपने संविधान की रक्षा करना, भारत की एकता और सीमाओं की सुरक्षा करना हमारे सर्वोच्च राष्ट्रीय कर्तव्य हैं।
कर्तव्य के प्रति अडिग समर्पण
होसबाले ने कहा कि भारतीय सेना, सुरक्षा बलों, पुलिस और लोगों द्वारा संचालित सभी प्रकार के सामाजिक एवं धार्मिक संस्थानों ने भारत गणराज्य को सुरक्षित और संरक्षित रखा है। उन्होंने कहा कि वे ‘कर्तव्य के प्रति अडिग समर्पण’ के साथ देश की प्राचीन विरासत का संरक्षण और संवर्धन भी कर रहे हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए भारत गणराज्य की रक्षा के लिए हमें समाज के प्रति प्रेम और करुणा एवं कमजोर लोगों के प्रति स्नेह और सहानुभूति विकसित करनी चाहिए और उनकी सेवा में स्वयं को समर्पित करना चाहिए। हमें जीवन के हर पहलू में भारत के हर क्षेत्र और हर आयाम के विकास के लिए हर क्षण प्रयासरत रहना चाहिए।
उन्होंने कहा कि आरएसएस के स्वयंसेवक पिछले 100 वर्षों से इस ‘साधना’ का अभ्यास कर रहे हैं – गणराज्य की रक्षा करना, भारतीय समाज की सेवा करना और भारत के ‘राष्ट्र धर्म’ से प्रेरणा लेकर आगे बढ़ना।














