ग्रीक सिटी टाइम्स के मुताबिक, रिटायर्ड इंडियन एयर मार्शल अनिल चोपड़ा के मौजूदा ग्रीस-साइप्रस-इजरयल त्रिपक्षीय फ्रेमवर्क में भारत को शामिल करके मेडिटेरेनियन क्वाड में बदलने के प्रस्ताव ने भूराजनीतिक हलकों में बहस छेड़ दी है। चोपड़ा का सुझाव है कि इसमें ना सिर्फ भारत बल्कि संयुक्त अरब अमीरात (UAE) को भी शामिल किया जा सकता है। हालांकि भारत ने आधिकारिक तौर पर ऐसा कोई संकेत अभी नहीं दिया है।
इस्लामिक नाटो का करेगा मुकाबला
पाकिस्तान ने बीते साल सऊदी अरब के साथ रक्षा समझौता किया है। इसमें तुर्की के भी आने की संभावना है। सऊदी अरब और पाकिस्तान इसके लिए तुर्की से बात कर रहे हैं। यह नाटो स्टाइल का समझौता है, जिसमें एक देश पर हमले को गुट के दूसरे सदस्यों पर भी हमला मान जाएगा। ऐसे में इसे इस्लामिक नाटो कहा जा रहा है। पाकिस्तान से तनावपूर्ण रिश्ते के बीच इस्लामिक नाटो की यह कोशिश भारत की चिंता बढ़ा रही है।
सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान साथ होने पर मिलकर एक बड़ी सैन्य और आर्थिक ताकत बन जाते हैं। ऐसे में इसके जवाब के तौर पर भारत के ऐसे गुट में शामिल होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है, जिसमें इजरायल जैसी मजबूत सैन्य ताकत हो। वहीं यूएई के भारत और इजरयल के साथ आने की चर्चा इसलिए जोर पकड़ रही है क्योंकि उसके सऊदी अरब से रिश्ते फिलहाल निचले स्तर पर हैं।
कैसे बदल रहे हैं समीकरण
सऊदी-पाकिस्तान-तुर्की का गठबंधन भारत के लिए गंभीर रणनीतिक चिंताएं पैदा करता है। वहीं सऊदी की ताकत यूएई के लिए चिंता का सबब है। भारत के इजरायल, ग्रीस, साइप्रस से अच्छे संबंध हैं। यूएई के इजरायल और भारत से अच्छे संबंध हैं। ये समीकरण ऐसे हैं कि यूएई और भारत इस गुट में आ सकते हैं। ऐसे में संभव है कि भविष्य में यूएई, भारत, इजरायल, ग्रीस और साइप्रस एक साथ मेडिटेरेनियन क्वाड के तौर पर दिखें।














