भारत में हैं एंटोनियो कोस्टा की जड़ें
भारत के साथ ट्रेड डील को अंतिम रूप देने के लिए यूरोपियन यूनियन की अगुवाई एंटोनियो लुइस सैंटोस कोस्टा और यूरोपियन कमीशन की प्रेसिडेंट उर्सुला फॉन डेर लेयेन ने साथ मिलकर की है। दोनों गणतंत्र दिवस के मौके पर भारत के मुख्य अतिथि की भी भूमिका निभा चुके हैं। इस संधि की घोषणा करते हुए यूरोपियन काउंसिल के प्रेसिडेंट कोस्टा ने भारत के साथ अपने पारिवारिक और भावनात्मक जुड़ाव का भी खुलासा किया है।
‘मैं एक प्रवासी भारतीय नागरिक भी हूं’
यूरोपियन काउंसिल के प्रेसिडेंट ने लोगों को चौंकाते हुए कहा, ‘मैं यूरोपियन काउंसिल का प्रेसिडेंट हूं, लेकिन मैं एक प्रवासी भारतीय नागरिक भी हूं।’ उन्होंने आगे कहा,’तब आप कल्पना कर सकते हैं कि मेरे लिए इसका विशेष मतलब है। मुझे गोवा में मेरी जड़ों पर काफी गर्व है, जहां से मेरे पिता का परिवार आया था और यूरोप एवं भारत के बीच का कनेक्शन मेरे लिए कुछ ही निजी है।’
कोस्टा का गोवा कनेक्शन क्या है?
गोवा पहले एक पुर्तगाली कॉलोनी था। कोस्टा के दादा का जन्म गोवा में ही हुआ था और उन्होंने अपने जीवन का अधिकतर हिस्सा वहीं बिताया। एंटोनियो लुइस सैंटोस कोस्टा के पिता ऑरलैंडो दा कोस्टा एक जाने-माने लेखक थे, जिनके कार्यों में गोवा की गहरी छाप दिखती रही। वह आज भी कोंकणी उपनाम ‘बाबुश’ से जाने जाते हैं।
2 अरब लोगों का एक फ्री ट्रेड जोन बना
इससे पहले यूरोपियन कमीशन की प्रेसिडेंट उर्सुला फॉन डेर लेयेन ने इस ऐतिहासिक ट्रेड डील के पूरे होने की घोषण की, जिसमें करीब 18 साल लग गए। लेयेन बोलीं, ‘यूरोप और भारत आज इतिहास बना रहे हैं। हमनें मदर ऑफ ऑल डील्स पूरी कर ली है। हमने 2 अरब लोगों का एक फ्री ट्रेड जोन बनाया है, जिसमें दोनों ही पक्षों को फायदा होना है। यह तो केवल शुरुआत है। हम हमारे रणनीतिक संबंधों में और मजबूत होकर उभरेंगे।’ इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी समझौते का स्वागत किया और कहा कि इससे भारत में दुनिया का विश्वास बढ़ेगा।














