ईटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक का कहना है कि RBI का डिविडेंड और जीडीपी का अनुपात शायद स्थिर रहेगा, लेकिन अगर RBI अपना आकस्मिकता जोखिम बफर (CRB) कम करता है तो यह बढ़ सकता है। CRB की सीमा वित्त वर्ष 2026 में बढ़ाकर 4.5-7.5% कर दी गई थी, जो पहले 5.5-6.5% थी। स्टैंडर्ड चार्टर्ड ने अपने बजट अनुमान में कहा है, “RBI ने वित्त वर्ष 2026 में CRB की सीमा 7.5% रखी है, लेकिन अगर इसे घटाकर 5.5% कर दिया जाए और डॉलर की बिक्री में और तेजी लाई जाए, तो RBI ₹2.5-3.0 लाख करोड़ का डिविडेंड दे सकता है।” बैंक के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में RBI का डिविडेंड जीडीपी का औसतन 0.7% रहा है।
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कहां से आया पैसा?
BofA ग्लोबल रिसर्च का कहना है कि RBI का डिविडेंड अब सरकारी बजट के हिसाब-किताब के लिए एक अहम कड़ी बन गया है। उसने कहा, “पिछले कुछ साल में RBI का सरकार को दिया जाने वाला डिविडेंड, ऊंचे ब्याज दरों और लगातार रुपये के कमजोर होने और उसमें RBI के दखल की वजह से सरकारी खजाने के लिए लगातार ज्यादा महत्वपूर्ण होता गया है।”
BofA का अनुमान है कि यह ट्रांसफर ₹2.9 लाख करोड़ होगा। उसका कहना है कि अगर RBI अपनी पूंजी की पर्याप्तता कम रखता है, तो वह ज्यादा डिविडेंड दे सकता है। ICICI बैंक, बार्कलेज और HSBC भी वित्त वर्ष 2027 में RBI से ₹3 लाख करोड़ के डिविडेंड का अनुमान लगा रहे हैं, जिसका मुख्य कारण विदेशी मुद्रा से हुई कमाई है। IDFC फर्स्ट बैंक की मुख्य अर्थशास्त्री गौरा सेन गुप्ता ने कहा कि RBI के डॉलर खरीदने की ऐतिहासिक लागत फिलहाल ₹69.3 प्रति डॉलर चल रही है। इसका मतलब है कि हाल के महीनों में डॉलर बेचने से उसे फायदा हुआ है।
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रुपये में गिरावट
मंगलवार को रुपया डॉलर के मुकाबले 91.72 पर बंद हुआ, जो पिछले साल 2 अप्रैल को 85.60 था। इस दौरान रुपये में 7% की गिरावट आई, भले ही RBI ने मुद्रा की अस्थिरता को रोकने के लिए दखल दिया। हालांकि, सेन गुप्ता का अनुमान है कि इस साल RBI को विदेशी मुद्रा बाजार में दखल देने से होने वाली कमाई कम होगी, जिसका असर डिविडेंड पर पड़ेगा।












