केंद्रीय मंत्री ने कहा खराब विजिलिटी
हालांकि, हादसे के बारे में नागर विमानन मंत्री के राममोहन नायडू ने खराब विजिबिलिटी का एक कारण बताते हुए कहा है कि विमान खराब दृश्यता के बीच उतरने की कोशिश कर रहा था। लेकिन, ऐसे में जानकारों का कहना है कि फिर डीजीसीए की तरफ से विजिबिलिटी तीन हजार मीटर क्यों बताई? एविएशन एक्सपर्ट अमित सिंह का कहना है कि जिस रनवे नंबर-11 पर यह प्लेन उतरने की कोशिश कर रहा था। वहां सूरज सामने था।
ऐसे में यह हो सकता है कि पायलट को सूरज की तेज किरणों के सामने पड़ने से रनवे ठीक से दिखाई ना दिया हो। दूसरा, एक और बड़ा कारण रनवे का भ्रम भी हो सकता है। जिसमें पायलट को रनवे असल रनवे के पास दिखाई दिया हो और पायलट ने प्लेन को वहां लैंड करने की कोशिश कराई हो। लेकिन जब तक पायलट को यह आभास हुआ हो कि लैंडिंग गलत हो रही है। तब तक देर हो चुकी हो।
क्या कह रहे एक्सपर्ट?
एक्सपर्ट अमित सिंह का कहना है कि तस्वीरों को देखने से यह लगता है कि पायलट ने अंतिम समय में रनवे के लेफ्ट साइड में क्रैश हुए प्लेन को लेफ्ट में ले जाने की कोशिश की थी। क्योंकि, राइट साइड में रनवे उंचाई पर है। ऐसे में प्लेन उस वक्त तक रनवे की तरफ नहीं ले जाया जा सकता था। ऐसे में पायलट ने प्लेन को लेफ्ट साइड में लेते हुए फिर से उपर उठाने की कोशिश की हो। लेकिन उस वक्त तक प्लेन इतना नीचे आ गया कि वह क्रैश हो गया।
हादसे में यह भी पता लगाना जरूरी है कि आखिर पायलट ने अंतिम समय में एटीसी को जवाब क्यों नहीं दिया। जबकि उसने रनवे दिखाई देने की बात कही थी। इसके बाद प्लेन रनवे पर लैंड ना करते हुए पास में क्यों लैंड हो रहा था। इस कंपनी का एक प्लेन 2023 में भी क्रैश हुआ था। जिसकी रिपोर्ट एएआईबी ने अभी तक भी जारी नहीं की है।













