जस्टिस पुरुशैन्द्र कुमार कौरव ने गुरुवार को अधिकार क्षेत्र के आधार पर याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने समीर वानखेड़े को सक्षम अधिकार क्षेत्र वाली अदालत में जाने के लिए कहा है। कोर्ट ने कहा, ‘याचिकाकर्ता को सक्षम अधिकार क्षेत्र वाली अदालत में जाने के लिए याचिका वापस की जाती है। इस बाबत कोई भी आवेदन खारिज किया जाता है।’
कोर्ट ने कहा- समीर वानखेड़े उचित फोरम में जाने के लिए स्वतंत्र हैं
जस्टिस पुरुशैन्द्र कुमार कौरव ने कहा कि उनके पास याचिका पर सुनवाई करने का अधिकार क्षेत्र नहीं है, जिससे मामला प्रभावी रूप से खारिज हो गया। हालांकि, यह स्पष्ट किया कि समीर वानखेड़े, जो 2021 में आर्यन खान को कथित तौर पर ड्रग्स रखने, सेवन करने और तस्करी के आरोप में गिरफ्तार करने के लिए खबरों में आए थे, वे उचित फोरम में जाने के लिए स्वतंत्र हैं।
अदालत में तीन-तीन वकीलों के बीच जिरह
कोर्ट ने वानखेड़े की ओर से दायर अंतरिम निषेधाज्ञा आवेदन में तय किए जाने वाले दो सवाल तय किए थे। पहला, क्या मुकदमा दिल्ली में सुनवाई योग्य है और दूसरा, क्या विवादित सीन, पूरे संदर्भ में देखने पर आलोचना और क्रिएटिव लिबर्टी की सीमाओं को पार करता है। अदालत में सीनियर एडवोकेट जे साई दीपक वानखेड़े की ओर से पेश हुए। जबकि सीनियर एडवोकेट नीरज किशन कौल ने रेड चिलीज एंटरटेनमेंट की ओर से मौजूद रहे। इसके अलावा नेटफ्लिक्स की ओर से वरिष्ठ वकील राजीव नैयर अदालत में पेश हुए।
समीर वानखेड़े ने सीरीज पर लगाए हैं ये आरोप
समीर वानखेड़े ने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि नेटफ्लिक्स की सीरीज ने उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने 2 करोड़ रुपये के हर्जाने की भी मांग की, जिसे वह कैंसर रोगियों के लिए टाटा मेमोरियल कैंसर अस्पताल को दान करने वाले हैं। IRS अधिकारी की याचिका में एक खास सीन पर भी आपत्ति जताई गई है, जिसमें एक किरदार को ‘सत्यमेव जयते’ बोलने के तुरंत बाद मिडिल फिंगर उठाते हुए दिखाया गया है।
समीर वानखेड़े के वकील ने दिया ये तर्क
गुरुवार को सुनवाई के दौरान, समीर वानखेड़े की ओर से पेश वकील जे साई दीपक ने तर्क दिया कि मानहानि का मुकदमा दिल्ली में सुनवाई योग्य है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में समीर वानखेड़े के रिश्तेदारों की मौजूदगी है। इसके अलावा, मामला दिल्ली में सुना जा सकता है क्योंकि पूर्व NCB अधिकारी से जुड़ी डिपार्टमेंटल कार्यवाही भी यहीं पेंडिंग थी।
रेड चिलीज के वकील ने इस तर्क से किया पलटवार
इस याचिका का विरोध करते हुए, रेड चिलीज एंटरटेनमेंट की लीगल टीम ने इसकी टेरिटोरियल मेंटेनेबिलिटी को चुनौती दी, और कहा कि मुकदमा मुंबई में दायर किया जाना चाहिए था, ना कि दिल्ली में। वकील ने कहा कि वानखेड़े मुंबई में रहते हैं और प्रोडक्शन हाउस का रजिस्टर्ड ऑफिस भी वहीं है, इसलिए मुंबई इस मामले के लिए सही ज्यूरिस्डिक्शन है।
नेटफ्लिक्स ने कहा- शो का मकसद व्यंग और डार्क कॉमेडी है
नेटफ्लिक्स ने अंतरिम रोक की अपील का विरोध करते हुए कहा कि ऐसे मामलों में मानहानि का पैमाना बहुत ऊंचा होता है, जिसे शुरुआती स्टेज पर साबित नहीं किया जा सकता। वकील नैयर ने कहा कि वानखेड़े के खिलाफ जांच और जबरन वसूली के आरोपों की जानकारी 2022 से ही पब्लिक डोमेन और सोशल मीडिया पर है और ऐसे कंटेंट के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है। उन्होंने आगे कहा कि शो का मकसद व्यंग्य और डार्क कॉमेडी के जरिए बॉलीवुड कल्चर को बेनकाब करना है, जिसे मानहानि के मुकदमे में रोका नहीं जा सकता।
मानहानि केस में किन्हें बनाया गया है आरोपी
जानकारी के लिए बता दें कि समीर वानखेड़े ने इस मुकदमे में शाहरुख खान और गौरी खान की कंपनी रेड चिलीज एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड, नेटफ्लिक्स, एक्स कॉर्प (पहले ट्विटर), गूगल एलएलसी, मेटा प्लेटफॉर्म्स, आरपीजी लाइफस्टाइल मीडिया प्राइवेट लिमिटेड और जॉन डो को प्रतिवादी बनाया था।
समीर वानखेड़ ने किया है ये दावा
समीर वानखेड़े का दावा है कि ‘बैड्स ऑफ बॉलीवुड’ सीरीज में दिखाए गए सीन कथित तौर पर ‘झूठे, दुर्भावनापूर्ण और मानहानिकारक’ हैं। उनका कहना था कि यह ‘जानबूझकर इस तरह से बनाया और दिखाया गया है’ ताकि उनकी प्रतिष्ठा को ‘गलत और पक्षपातपूर्ण तरीके से’ नुकसान पहुंचाया जा सके, खासकर तब जब उनसे और आर्यन खान से जुड़ा मामला बॉम्बे हाई कोर्ट और NDPS स्पेशल कोर्ट में पेंडिंग और विचाराधीन है। यह भी कहा गया कि सीरीज में एक किरदार ‘अश्लील इशारा’ करते हुए दिखाया गया है, खासकर, ‘सत्यमेव जयते’ का नारा लगाने के बाद।
‘अश्लील इशारे राष्ट्रीय सम्मान का अपमान’
समीर वानखेड़े की याचिका में इस तरह के अश्लील इशारे राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम, 1971 के प्रावधानों का गंभीर और संवेदनशील उल्लंघन है, जिसके तहत कानून के तहत दंडात्मक परिणाम हो सकते हैं। मुकदमे में आगे कहा गया है कि सीरीज का कंटेंट सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (BNS) के विभिन्न प्रावधानों का उल्लंघन करता है, क्योंकि यह अश्लील और आपत्तिजनक सामग्री का इस्तेमाल करके राष्ट्रीय भावनाओं को ठेस पहुंचाने की कोशिश करता है।













