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  • SIR में जिन्हें मिला नोटिस, सार्वजनिक जगहों पर लगाएं उनके नाम, सुप्रीम कोर्ट का निर्देश

    नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को चुनाव आयोग से कहा कि SIR प्रक्रिया में जो मतदाता तार्किक विसंगतियों की सूची में शामिल हैं, उनके नाम ग्राम पंचायत भवनों, ब्लॉक दफ्तरों और तालुका के सार्वजनिक स्थानों पर प्रदर्शित किए जाएं। यहां संबंधित दस्तावेज और आपत्तियां भी जमा की जा सकेंगी। गुरुवार को चीफ जस्टिस सूर्यकांत


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    By Azad Hind Desk जनवरी 30, 2026
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    नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को चुनाव आयोग से कहा कि SIR प्रक्रिया में जो मतदाता तार्किक विसंगतियों की सूची में शामिल हैं, उनके नाम ग्राम पंचायत भवनों, ब्लॉक दफ्तरों और तालुका के सार्वजनिक स्थानों पर प्रदर्शित किए जाएं। यहां संबंधित दस्तावेज और आपत्तियां भी जमा की जा सकेंगी। गुरुवार को चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच डीएमके की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल, अमित आनंद तिवारी और अधिवक्ता विवेक सिंह की दलीलों पर सुनवाई कर रही थी।

    डीएमके ने आग्रह किया था कि जिनके नाम तार्किक विसंगतियों की सूची में हैं, उन्हें तमिलनाडु में चुनाव पूर्व वोटर लिस्ट में शामिल होने का दावा करने के लिए पर्याप्त समय मिले। इन विसंगतियों की श्रेणी में शामिल लोगों को अवसर देने के उद्देश्य से पीठ ने निर्देश जारी किए।

    SIR को चुनौती देने वाली याचिका पर फैसला सुरक्षित

    सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को बिहार में वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को चुनौती देने वाली याचिकाओं के एक समूह पर फैसला सुरक्षित रख लिया। इनमें एनजीओ एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स द्वारा दायर याचिका भी शामिल है। अदालत यह परीक्षण कर रही है। कि क्या भारतीय निर्वाचन आयोग को संविधान के अनुच्छेद 326, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 और उसके तहत बनाए गए नियमों के अंतर्गत वर्तमान स्वरूप में SIR कराने का अधिकार है।

    NRC जैसी प्रक्रिया होने का Supreme Court में दावा

    चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने मामले में अंतिम सुनवाई पूरी की। याची की ओर से दलील दी गई कि SIR एक अप्रत्यक्ष ‘एनआरसी जैसी प्रक्रिया’ है, जिससे निर्वाचन आयोग वास्तव में नागरिकता सत्यापन का प्राधिकरण बन जाता है। मतदाता की पात्रता पर संदेह होने की स्थिति में जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 16 के तहत निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए। निर्वाचन आयोग ने कहा कि नागरिकता सत्यापन संबंधी आरोपों को केवल निर्वाचन उद्देश्यों के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। यह सत्यापन गैर- नागरिकों को देश से बाहर करने के उद्देश्य से नहीं किया जा रहा है। सत्यापन प्रक्रिया “उदार और सॉफ्ट टच” है और इसमें किसी कठोर जांच की बात नहीं है।

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