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  • खालिस्तानियों को पालने वाले कनाडा के 2 टुकड़े करने की मांग तेज, अल्बार्टा चाहता है आजादी, मदद करेंगे ट्रंप?

    वॉशिंगटन/ओटावा: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से कनाडा के अलगाववादी संगठन ने आजादी दिलाने की मांग की है। इससे कनाडा आगबबूला हो गया है। ये वही कनाडा है, जो पिछले 50 सालों से खालिस्तानियों को पालता आया है। इसने खालिस्तानियों के खिलाफ कार्रवाई की भारत की मांग को लगातार खारिज किया है। भला कौन भूल


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    By Azad Hind Desk जनवरी 30, 2026
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    वॉशिंगटन/ओटावा: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से कनाडा के अलगाववादी संगठन ने आजादी दिलाने की मांग की है। इससे कनाडा आगबबूला हो गया है। ये वही कनाडा है, जो पिछले 50 सालों से खालिस्तानियों को पालता आया है। इसने खालिस्तानियों के खिलाफ कार्रवाई की भारत की मांग को लगातार खारिज किया है। भला कौन भूल सकता है कि पूर्व कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर को लेकर कितना बखेड़ा किया था। कनाडा के पीएम मार्क कार्नी ने डोनाल्ड ट्रंप से “कनाडाई संप्रभुता का सम्मान करने” का आग्रह किया है।

    फाइनेंशियल टाइम्स ने बताया है कि अमेरिकी विदेश विभाग के अधिकारियों ने पिछले अप्रैल से तीन बार एक ऐसे संगठन के नेताओं से मुलाकात की है जो चाहते हैं कि अल्बर्टा प्रांत, कनाडा से अलग हो जाए। अल्बर्टा प्रॉस्पेरिटी प्रोजेक्ट नाम का यह ग्रुप अल्बर्टा की आजादी के लिए जनमत संग्रह कराने की मांग कर रहा है। इसके नेता अल्बार्टा की आजादी के लिए अमेरिकी वित्त विभाग से 500 अरब डॉलर का क्रेडिट लाइन मांग रहे हैं।

    अल्बार्टा की कनाडा से आजादी की मांग क्या है?
    अल्बर्टा पश्चिमी कनाडा का एक तेल से भरपूर प्रांत है, जो लगभग अमेरिका के टेक्सास जितना बड़ा है। यहां करीब 50 लाख लोग रहते हैं और यह प्रांत रॉकीज पर्वत श्रृंखला और बैनफ और लेक लुईस जैसे टूरिस्ट डेस्टिनेशन से घिरा हुआ है। इस प्रांत की एक अनोखी राजनीतिक और सांस्कृतिक पहचान है। कनाडा में जितने तेल का उत्पादन होता है, उसका 84 प्रतिशत हिस्सा अल्बार्टा में ही निकलता है। इसीलिए इसे एनर्जी प्रांत भी कहा जाता है। राजनीतिक लिहाजा से इसे कनाडा की कंजर्वेटिव पार्टी का गढ़ माना जाता है, हालांकि इसके शहर क्षेत्र ज्यादा प्रगतिशील हैं। अल्बर्टा की प्रधानमंत्री डेनिएल स्मिथ ट्रंप और दूसरे रिपब्लिकन नेताओं के साथ दोस्ताना रिश्ता रखती हैं। वो पिछले साल जनवरी में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निजी आवास मार-ए-लागो भी गईं थीं। माना जा रहा है कि उसके बाद से ही ट्रंप ने अल्बार्टा की आजादी की मांग को हवा देना शुरू कर दिया था।

    कनाडा से आजादी क्यों चाहता है अल्बार्टा?
    अल्बर्टा के अलगाववादी समूहों का आरोप है कि ओटावा में उनके हितों का ठीक से प्रतिनिधित्व नहीं होता है। उनका तर्क है कि जलवायु परिवर्तन को रोकने के लिए संघीय सरकार की कोशिशें अल्बर्टा के तेल उद्योग को रोक रही हैं। उनका मानना है कि वो जितना टैक्स चुकाते हैं, उतना अल्बार्टा को वापस नहीं मिलता है। उनके अधिकारियों को कनाडा के पूर्वी प्रांत, जो ज्यादा आबादी वाले हैं, वो दबा रहे हैं। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की लिबरल पार्टी ने अप्रैल में 2025 में चुनाव जीतने के लिए एंटी-ट्रंप भावना का खूब फायदा उठाया था, जिसके तुरंत बाद अल्बर्टा विधानमंडल ने एक कानून पास किया, जिससे आजादी पर जनमत संग्रह कराना आसान हो गया। डोनाल्ड ट्रंप अब इसी को भुना रहे हैं।

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