इजरायली खुफिया एजेंसियों ने अमेरिका को क्या बताया
इजरायली खुफिया एजेंसियों ने अमेरिका को बताया है कि ईरान इस बार पहले से तेज और खतरनाक पलटवार करेगा। अमेरिकी हमले के बाद ईरानी जवाबी कार्रवाई संभवत इजरायल के प्रमुख शहरों पर केंद्रित होगा। हालांकि, यह पिछले साल 2 जून के ईरानी हमले से अलग होगा, जिसमें तेहरान ने इजरायल के ज्यादातर सैन्य ठिकानों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों को निशाना बनाया था। इसमें एक साथ सैकड़ों की संख्या में मिसाइलें और ड्रोन शामिल होंगे, जो अमेरिकी और इजरायली एयर डिफेंस को आसानी से भेद देंगे। इससे इजरायल को भारी नुकसान पहुंच सकता है और जान-माल पर खतरा भी बढ़ेगा।
डोनाल्ड ट्रंप ने बदली ईरान पर अमेरिकी रणनीति
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ईरान में जारी विरोध प्रदर्शनों का समर्थन कर रहे थे। वह प्रदर्शनकारियों को ईरानी सरकार के खिलाफ और ज्यादा प्रदर्शन के लिए उसका भी रहे थे। इसी के साथ ट्रंप ने ईरान को प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई न करने का दबाव भी बनाया था। हालांकि, अब उन्होंने अपना रुख बदल लिया है और वह इसके बजाए ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि ट्रंप की ईरान नीति में बदलाव के पीछे का कारण अमेरिकी और इजरायली खुफिया रिपोर्ट हैं। हालांकि, ट्रंप ने पिछले साल कई बाद ऐसा दावा किया था कि अमेरिका ने हवाई हमला कर ईरानी परमाणु सुविधाओं को नष्ट कर दिया है।
ईरान के खिलाफ क्या कर रहे अमेरिका-इजरायल
ट्रंप की धमकियों के बीच अमेरिका ने मध्य पूर्व में भारी सैन्य बल तैनात किए हैं। इनमें एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस अब्राहम लिंकन शामिल है। इसके अलावा छह विध्वंसक पोत और तीन अतिरिक्त युद्धपोत भी भेजे गए हैं। इनके अलावा बड़ी संख्या में लड़ाकू विमानों, अलग-अलग रिफ्यूलिंग एसेट्स और एयर डिफेंस सिस्टम को भी तैनात किया गया है। इजरायल की रक्षा के लिए भी अमेरिका ने कई एयर डिफेंस यूनिटों को भेजा है। अमेरिका और इजरायली खुफिया एजेंसियां ईरान में इंटेलिजेंस इकट्ठा कर रही हैं। इनमें सैटेलाइट तस्वीरों का एनालिसिस, कम्युनिकेशन को इंटरसेप्ट करना और ह्यूमन सोर्स का इस्तेमाल शामिल है।














