बांग्लादेश की मोहम्मद यूनस सरकार इस समय मुश्किल में फंसी हुई है। एक तरफ वह टेक्सटाइल मिलों के भारी विरोध का सामना कर रही है, जिनका कहना है कि ड्यूटी फ्री आयात ने उन्हें बर्बादी के कगार पर पहुंचा दिया है। वहीं, कपड़ा निर्यातक चेतावनी दे रहे हैं कि कोई भी नई ड्यूटी देश की वैश्विक प्रतिस्पर्धा को कमजोर करेगी।
बांग्लादेश का सबसे बड़ा धागा निर्यातक है भारत
भारत बांग्लादेश को सूती धागे का सबसे बड़ा निर्यातक हैं। भारत ने 2025 में 3.57 अरब डॉलर मूल्य के सूती धागे का निर्यात किया था। बांग्लादेश इसका सबसे खरीदार था, जिसने कुल शिपमेंट का 45.9 प्रतिशत आयात किया। वहीं, बांग्लादेश के कुल आयात में भारतीय हिस्सा 82 प्रतिशत है। लेकिन बांग्लादेश में इसका विरोध हो रहा है और कहा जा रहा है कि इससे घरेलू कपास उत्पादकों को भारी नुकसान हो रहा है, क्योंकि कीमतें लगातार गिर रही हैं।
बांग्लादेशी कपड़ा निर्यातक यूनुस के खिलाफ
कपड़ा निर्यातक इस मुद्दे को अलग तरह से देखते हैं। निर्यातकों का तर्क है कि स्थानीय स्तर पर तैयार धागा बहुत महंगा है और गुणवत्ता में भी सही नहीं होता। बांग्लादेश प्रमुख टेक्सटाइल का निर्यातक और ग्लोबल ब्रांड भारतीय सप्लाई को पसंद करते हैं। बांग्लादेश में भारतीय धागे के आयात की यह बड़ी वजह है। एक्सपोर्टर को डर है कि आयात में किसी भी रुकावट से लागत बढ़ेगी, शिपमेंट में देरी होगी और अंत में इसका असर देश के ग्लोबल टेक्सटाइल मार्केट पर पड़ेगा।
भारतीय धागे को रोकने की यूनुस की चाल
पिछले साल अप्रैल में यूनुस सरकार ने प्रमुख लैंडपोर्ट के माध्यम से भारत से धागा आयात करने की अनुमति देना बंद कर दिया था। इसके पहले बांग्लादेश को भारत से होने वाले धागा निर्यात का 32 प्रतिशत जमीन के रास्ते होता था। हालांकि, इसके बाद भी घरेलू धागे की मांग में ज्यादा सुधार नहीं हुआ। ऐसे में भारतीय आयात पर टैक्स लगाने की मांग हो रही है। हालांकि, यह निश्चित नहीं है कि यूनुस सरकार ड्यूटी को लगाएगी या नहीं। 12 फरवरी को देश में राष्ट्रीय चुनाव को देखते हुए अंतिम फैसला अगली सरकार पर छोड़ा जा सकता है।













