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  • Maghi Poornima 2026: एक माह के कल्पवास के बाद माघी पूर्णिमा है मनोकामना पूर्ति का दिव्य पर्व

    Maghi Poornima 2026 : एक माह तक आस्था की नगरी में रहकर नियम, व्रत और साधना का पालन करने वाले कल्पवासी माघी पूर्णिमा के दिन पवित्र स्नान कर अपने-अपने गृहस्थ जीवन की ओर लौटते हैं। एक मास से गंगा की रेती पर टिके कल्पवासी प्रसाद के रूप में संगम की रेती लेकर आस्था की नगरी


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    By Azad Hind Desk जनवरी 31, 2026
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    Maghi Poornima 2026 : एक माह तक आस्था की नगरी में रहकर नियम, व्रत और साधना का पालन करने वाले कल्पवासी माघी पूर्णिमा के दिन पवित्र स्नान कर अपने-अपने गृहस्थ जीवन की ओर लौटते हैं। एक मास से गंगा की रेती पर टिके कल्पवासी प्रसाद के रूप में संगम की रेती लेकर आस्था की नगरी से विदाई लेते हैं। यद्यपि प्रत्येक पूर्णिमा का अपना विशेष महत्व होता है, किंतु माघी पूर्णिमा का स्थान अत्यंत विशिष्ट माना गया है। धर्मशास्त्रों के अनुसार इस दिन स्नान, ध्यान और दान करने से मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। इस पावन तिथि पर जप, हवन तथा पुण्यकर्म करने से अनंत फल की प्राप्ति होती है और नवग्रह जनित दोषों का शमन होता है।

    माघी पूर्णिमा 2026 मान्यता
    मान्यता है कि माघी पूर्णिमा की रात्रि चंद्रमा अपनी अमृतमयी किरणों से पृथ्वी के जल में एक विशिष्ट तत्व का संचार करता है, जो सामान्य जन के लिए कष्ट निवारक और आरोग्यदायक सिद्ध होता है। इस दिन प्रयागराज का संगम तट श्रद्धा, विश्वास और भक्ति का अद्भुत केन्द्र बन जाता है, जहाँ असंख्य श्रद्धालु पुण्य स्नान हेतु एकत्र होते हैं।

    माघी पूर्णिमा 2026 व्रत विधि
    माघी पूर्णिमा के व्रत को बत्तीसी पूर्णिमा भी कहा जाता है। व्रत विधि के अनुसार प्रातःकाल तिल मिश्रित जल से स्नान करने का विधान है। संतान प्राप्ति अथवा सौभाग्य वृद्धि की कामना से मध्याह्न काल में भगवान शिव शंकर की विशेष पूजा की जाती है। माघ मास के साथ ही शीत ऋतु की विदाई और बसंत ऋतु का आगमन प्रारम्भ हो जाता है, जिससे चारों ओर का वातावरण आनंददायक और उत्सवपूर्ण बन जाता है।

    माघी पूर्णिमा 2026 महत्व
    माघी पूर्णिमा का पर्व पुण्य, शांति और संतुलन की दिशा में मनुष्य को अग्रसर करता है। इस दिन यज्ञ, तप और दान का विशेष महत्व बताया गया है। गंगा स्नान से जीवन की समस्त बाधाओं के दूर होने की शास्त्रीय मान्यता है। परंपरा के अनुसार खरबूजे के बीज से बने लड्डू में सामथ्र्य अनुसार आभूषण छिपाकर ब्राह्मण को दान दिया जाता है। साथ ही काले तिलों से हवन एवं काले तिलों द्वारा पितरों का तर्पण किया जाता है, जिससे अतृप्त आत्माओं को शांति प्राप्त होती है।

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