फ्रांसीसी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक फाइटर जेट्स के चार ग्रुप कॉन्यैक, काज़ो, बोर्डो और क्लेरमोंट-फेरैंड के सिविलियन एयरपोर्ट पर एयर बेस के लिए उड़ान भरे थे। इस युद्धाभ्यास के दौरान फैसला लेने की स्पीड को ज्यादा से ज्यादा करने पर ध्यान दिया गया। इसे “समय के साथ रेस” कहा गया। इस अभ्यास का मकसद लड़ाकू विमानों को खतरे से बचाने के अलावा उनकी ऑपरेशनल क्षमता बनाए रखना और जरूरी मिसाइलों के साथ उनकी तेजी से एयरबेस पर तैनाती थी।
रूस के खिलाफ राफेल से फ्रांसीसी वायुसेना का अभ्यास
इस युद्धाभ्यास में 20 राफेल फाइटर जेट और 120 सैन्य कर्मियों ने हिस्सा लिया था। इसके बाद विमानों की सर्विसिंग की गई और उन्हें एक नए मिशन के लिए तैयार किया गया। SCALP क्रूज मिसाइलों से नकली दुश्मन पर हमला किया गया। इसके अगले दिन, यानी 28 जनवरी को SCALP क्रूज मिसाइलों से एक नकली दुश्मन को निशाना बनाया गया। इस मिशन के लिए एयरक्राफ्ट की टेक्निकल तैयारी पूरी रात भर की गई। इस प्रक्रिया के दौरान राफेल जेट की सर्विसिंग और SCALP मिसाइलों को उनके मिशन के लिए प्रोग्राम करना दोनों शामिल थे। कुछ राफेल विमानों को दो क्रूज मिसाइलों से भी लैस देखा गया।
फ्रांसीसी वायुसेना ने इस युद्धाभ्यास को लेकर कुछ तस्वीरें भी जारी की हैं। इसमें राफेल के पूरे कॉम्बैट इक्विपमेंट की तस्वीरें दिख रही हैं, जिनमें न सिर्फ फ्यूल टैंक और SCALP मिसाइलें हैं, बल्कि MICA और Meteor हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलें भी दिखाई दे रही हैं। हालांकि, इन क्रूज मिसाइलों को लॉन्च करते समय की कोई फोटो नहीं है। यह संभावना नहीं है कि फ्रांसीसी वायु सेना सच में एक्सरसाइज के दौरान इतनी महंगी मिसाइलें फायर करेगी, ऐसा लगता है कि उन्होंने सिर्फ “इलेक्ट्रॉनिक लॉन्च” को ही परखने की कोशिश की है।














