भारत और मध्य पूर्व के लिए आतंकवाद खतराः जयशंकर
बहरहाल, भारत और मिडिल ईस्ट के देशों के लिए आतंकवाद को समान रूप से खतरा बताते हुए विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा, “इन कई चुनौतियों को देखते हुए, हमारे साझा हित स्थिरता, शांति और समृद्धि की ताकतों को मजबूत करने की मांग करते हैं। हमारे दोनों क्षेत्रों में एक समान खतरा आतंकवाद है, जो अपने सभी रूपों और अभिव्यक्तियों में मौजूद है। सीमा पार आतंकवाद खासकर अस्वीकार्य है क्योंकि यह अंतरराष्ट्रीय संबंधों और कूटनीति के बुनियादी सिद्धांतों का उल्लंघन करता है।”
अरब देशों से आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होने का आह्वान
अरब लीग के देशों से आतंकवाद के खिलाफ आह्वान करते हुए जयशंकर ने कहा, “आतंकवाद से निशाना बनाए गए समाजों को अपना बचाव करने का अधिकार है और वे स्वाभाविक रूप से इसका इस्तेमाल करेंगे। यह जरूरी है कि हम इस वैश्विक बुराई से लड़ने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करें। आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस एक बिना समझौता वाला सार्वभौमिक कानून होना चाहिए।”
अरब देशों के साथ बैठक का मकसद क्या है?
- अरब देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक की भारत की मेजबानी का मकसद मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच व्यापार, ऊर्जा और रणनीतिक सहयोग में गहरा करना है।
- भारत और संयुक्त अरब अमीरात ने बातचीत की सह-अध्यक्षता की, जिसमें अरब लीग के सभी 22 सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा ले रहे हैं।
- यह नई दिल्ली में इस तरह की पहली बैठक है, जो 2016 में बहरीन में हुए पहले फोरम के बाद एक दशक के अंतराल के बाद हुई।













