जमात-ए-इस्लामी को भारत से क्या उम्मीद?
जमात-ए-इस्लामी ने कहा है कि अगर वह सत्ता में आती है तो ‘भारत के साथ अच्छे संबंधों को लेकर आशावादी’ है। जमात-ए-इस्लामी के असिस्टेंट सेक्रेटरी जनरल और मीडिया डिपार्टमेंट के चीफ अहसानुल महबूब जुबैर ने ABP लाइव से यह बात कही है। जुबैर ने कहा कि बांग्लादेश के लोगों ने कभी भी शेख हसीना और उनके परिवार की बातों पर विश्वास नहीं किया। जुलाई 2024 की क्रांति ने ये साबित कर दिया है। उन्होंने जमात-ए-इस्लामी को बाकी पार्टियों से अलग बताया।
जुबैर ने कहा कि बांग्लादेश के लोगों ने यह देखा है कि हम पर सभी हमलों और पाबंदियों के बावजूद हसीना के शासन में हम कैसे टिके रहे। उन्होंने कहा कि जमात-ए-इस्लामी ने कभी तानाशाह ताकतों के सामने घुटने नहीं टेके। हम कभी भी किसी भ्रष्टाचार में शामिल नहीं हुए।
बांग्लादेश चुनाव में जमात-ए-इस्लामी गठबंधन
बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी इस बार चुनाव में 11 पार्टियों के बड़े गठबंधन का नेतृत्व कर रही है। जुबैर ने कहा कि बांग्लादेश के लोग ने हम पर भरोसा किया है और अब बैलेट के जरिए भी भरोसा करने को तैयार हैं। भारत के साथ संबंधों पर जमात ने कहा कि एक बार जब चुनी हुई सरकार आएगी तो भारत और बांग्लादेश के बीच संबंध स्थापित होगा। उन्होंने यह भी उम्मीद जताई की चुनी हुई सरकार आने पर भारत के साथ हसीना के प्रत्यर्पण का मुद्दा भी हल हो सकता है।
शेख हसीना के बयानों से खुश नहीं जमात
जमात नेता ने कहा कि अगर उनकी पार्टी को देश चलाने के लिए जनादेश मिलता है, तो वह भारत के साथ सभी लंबित मुद्दों को सुलझाएंगे। उन्होंने तीस्ता नदी और दूसरी नदियों के पानी के बंटवारे को सबसे जरूरी मुद्दा बताया। इसके साथ ही उन्होंने सीमा पर हत्याओं को लेकर भी बातचीत का जरूरत बताई। अहसानुल महबूब जुबैर ने भारत की जमीन से शेख हसीना के बयानों पर चिंता जताई और उम्मीद जताई कि चुनी हुई सरकार के आने पर भारत हसीना की गतिविधियों पर रोक लगाएगा।














