फाल्गुन संकष्टी चतुर्थी 2026 कब है?
पंचांग के अनुसार, फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि का आरंभ 4 फरवरी, बुधवार को रात में 12 बजकर 10 मिनट पर होगा। वहीं, अगले दिन यानी 5 फरवरी, गुरुवार को रात में 12 बजकर 23 मिनट पर चतुर्थी तिथि रहेगी। ऐसे में फाल्गुन संकष्टी चतुर्थी का व्रत 5 फरवरी को रखा जाएगा। इस दिन चांद निकलने का समय 9 बजकर 45 मिनट रहेगा।
संकष्टी चतुर्थी 2026 पूजा विधि
- फाल्गुन संकष्टी चतुर्थी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नानादि करने के बाद साफ वस्त्र धारण करें। साथ ही, व्रत करने वालों को व्रत का संकल्प अवश्य लेना चाहिए।
- अपने पूजा घर में एक लकड़ी की चौकी पर लाल या पीले रंग का वस्त्र बिछाएं और उस पर भगवान गणेश की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।
- अब चारों ओर गंगाजल का छिड़काव करने के पश्चात गणपतिजी को फूल, जल, रोली आदि अर्पित करें।
- संकष्टी चतुर्थी पर गणेशजी को मोदक और तिल के लड्डू का भोग लगाना चाहिए।
- विधि-विधान से भगवान गणेश की धूप दीप आदि से पूजा आरती करें। फिर, मन में सुख-समृद्धि की कामना करें और प्रसाद सभी को बांटें।
- संकष्टी चतुर्थी पर शाम के समय व्रत कथा का पाठ भी अवश्य करना चाहिए। इसके बाद, चंद्रोदय होने पर चांद के दर्शन करके और अर्घ्य देने के पश्चात व्रत खोला जाता है।
संकष्टी चतुर्थी का क्या है महत्व?
ऐसी मान्यता है कि इस विशेष तिथि पर विघ्नहर्ता गणेशजी की विधि-विधान पूजा करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है। साथ ही, नकारात्मक ऊर्जा घर से दूर होती है और इसकी जगह सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। संकष्टी चतुर्थी का व्रत और पूजा करने से भगवान गणेश की कृपा से जीवन के कष्टों से राहत मिल सकती है। इससे भक्तों की मनोकामनाएं पूरी हो सकती हैं। साथ ही, इस तिथि पर चंद्र दर्शन करने का भी खास महत्व है। इसके बिना व्रत अधूरा रह सकता है।














