बिटकॉइन की कीमत 2.5% तक गिरकर 74,541 डॉलर (करीब 68 लाख रुपये) पर पहुंच गई। हालांकि बाद में इसमें कुछ रिकवरी हुई। शाम 5 बजे एक बिटकॉइन 77,662 डॉलर पर कारोबार कर रहा था। पिछले एक साल में बिटकॉइन की कीमत 20 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई है। यह गिरावट ऐसे समय आई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप क्रिप्टोकरेंसी के समर्थक माने जाते हैं। उनका एक कारोबार भी क्रिप्टो एक्सचेंज से जुड़ा है।
क्रिप्टो में ₹18000000000000, शेयर बाजार में ₹6000000000000 डूबे… बजट वाले दिन सोना-चांदी भी औंधे मुंह गिरे
जनवरी में 11 फीसदी की गिरावट
जनवरी में बिटकॉइन की कीमत में लगभग 11% की गिरावट आई थी। यह साल 2017 में इनिशियल कॉइन ऑफरिंग (ICO) के बूम के बाद आई गिरावट के बाद यह सबसे बड़ी गिरावट थी। यह गिरावट ऐसे समय में आई है जब शेयर बाजार में भी उथल-पुथल मची हुई है। सोने की कीमत भी सोमवार को गिरती रही, जो पिछले हफ्ते एक दशक में सबसे बड़ी गिरावट झेल चुका था।
एक लाख डॉलर के पार हो गया था बिटकॉइन
पिछले साल व्हाइट हाउस के क्रिप्टो-समर्थक रुख और संस्थागत निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी के कारण बिटकॉइन की कीमत 1,26,000 डॉलर (करीब 1.15 करोड़ रुपये) के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी। लेकिन इसके तुरंत बाद एक बड़ी बिकवाली हुई। तब से बिटकॉइन की कीमत लगभग 40% गिर चुकी है।
क्यों लुढ़की बिटकॉइन की कीमत?
कॉइनस्विच के मुताबिक बिटकॉइन में तेज गिरावट का कारण वीकेंड की कम लिक्विडिटी, बढ़ता भू-राजनीतिक जोखिम और बाजार में अत्यधिक लीवरेज था। ईरान के बंदर अब्बास बंदरगाह पर विस्फोट की खबरों के बाद जोखिम की भावना बिगड़ गई, जिससे निवेशकों ने जोखिम वाली संपत्तियों से दूरी बना ली।
डेल्टा एक्सचेंज की रिसर्च एनालिस्ट रिया सहगल ने कहा कि जनवरी में अमेरिकी स्पॉट बिटकॉइन ETF से 1.6 अरब डॉलर की शुद्ध निकासी ने बिकवाली को और बढ़ा दिया। यह संस्थागत निवेशकों द्वारा जोखिम कम करने का संकेत देता है। जब तक मैक्रो स्थिरता वापस नहीं आती और ETF में निवेश फिर से शुरू नहीं होता, तब तक क्रिप्टो बाजार रक्षात्मक बने रहने की संभावना है। ट्रेडर्स को उम्मीद है कि एक स्थायी रिकवरी शुरू होने से पहले बाजार में उतार-चढ़ाव या और गिरावट देखने को मिल सकती है।













