गैजेट्स के प्राइस तय करना होगा आसान
BenQ इंडिया और साउथ एशिया के मैनेजिंग डायरेक्टर, राजीव सिंह ने आज़ाद हिन्द टेक को बताया है कि अमेरिका-भारत के बीच समझौते से देश के टेक्नोलॉजी सेक्टर को बड़ा फायदा होगा। इससे भारतीय कंपनियां दुनिया भर में अपने कारोबार को बढ़ा सकेंगी और ज्यादा कॉम्पिटिटिव बन सकेंगी। खासकर इलेक्ट्रॉनिक्स और हार्डवेयर बनाने वाली कंपनियों के लिए यह एक अच्छा मौका है। कम टैरिफ से भारतीय टेक कंपनियों को दूसरे देशों में अपना सामान बेचना आसान होगा। इससे उनकी लागत कम होगी और वे विदेशी कंपनियों के साथ मिलकर काम कर सकेंगी। डिस्प्ले और डिजिटल सॉल्यूशन बनाने वाली कंपनियों के लिए भी यह अच्छी खबर है। टैरिफ कम होने से वे अलग-अलग देशों से सामान आसानी से मंगा सकेंगी और अपने एक्सपोर्ट को बढ़ा सकेंगी। यह ऐसे समय में हो रहा है जब भारत सरकार सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठा रही है।
रिपोर्टों के अनुसार, इस समझौते से किसी गैजेट की कीमत को तय करना आसान हो जाएगा। इससे फोन्स की कीमतों में कमी आ सकती है, लेकिन उसका फायदा भारतीय यूजर्स को मिलेगा या नहीं, अभी कहना जल्दबाजी होगी।
घट सकती हैं स्मार्टफोन्स की कीमतें
याद रखने वाली बात यह है कि भारत में स्मार्टफोन्स की मैन्युफैक्चरिंग लगातार बढ़ रही है। अमेरिका में अब मेड इन इंडिया आईफोन्स भेजे जा रहे हैं। अमेरिका-भारत के बीच डील होने से स्मार्टफोन और उससे जुड़े कॉम्पोनेंट्स बनाने वाली कंपनियों की चिंता कम होगी। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत और अमेरिका दोनों देशाें में स्मार्टफोन्स की कीमतें घट सकती हैं, लेकिन इसका असर बहुत जल्द दिखाई नहीं देगा। उसमें वक्त लग सकता है। सबसे ज्यादा फायदा ऐपल उठा सकती है।
सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में भी फायदा
रिपोर्ट के अनुसार, दोनों देशों के बीच हुई डील की टाइमिंग बहुत सही है। यह ऐसा समय है जब भारत अपने सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम को मजबूत कर रहा है। आने वाले वक्त में भारत में चिप डिजाइन, टेस्टिंग और उनकी मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिल सकता है। अगर देश में ही मैन्युफैक्चरिंग होगी तो उससे भारत को भी कम कीमतों पर चीजें उपलब्ध होंगी। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका के साथ हुए समझौते के बाद भारत खुद को इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में और मजबूत बना सकता है। इससे भारत में ना सिर्फ मैन्युफैक्चरिंग बढ़ेगी बल्कि लोगों को काम भी मिलेगा।
6G के विकास में मिल सकती है मदद
रिपोर्टों में कहा जा रहा है कि भारत और अमेरिका के बीच हुआ समझौता देश को टेलिकॉम के क्षेत्र में भी आगे लेकर जा सकता है। 6जी के डेवलपमेंट में तेजी आने की उम्मीद है। भारत स्वदेशी तकनीक के साथ-साथ अमेरिकी सहयोग भी पा सकेगा।













