• International
  • स्वीडन के ग्रिपेन फाइटर जेट ने राफेल लड़ाकू विमान को चटाई धूल, फ्रांसीसी जेट क्यों हुआ रेस से बाहर?

    बोगोटा: कोलंबिया की सरकार ने फ्रांस को बड़ा झटका देते हुए राफेल लड़ाकू विमान खरीदने से इनकार कर दिया है। स्वीडन के ग्रिपेन E/F फाइटर जेट ने फ्रांसीसी राफेल को धूल चटा जी है। कोलंबिया पहले फ्रांस से राफेल खरीदने के लिए बात कर रहा था, लेकिन उसने कई वजहों से स्वीडिश जेट को चुनने


    Azad Hind Desk अवतार
    By Azad Hind Desk फरवरी 4, 2026
    Views
    728 x 90 Advertisement
    728 x 90 Advertisement
    300 x 250 Advertisement
    बोगोटा: कोलंबिया की सरकार ने फ्रांस को बड़ा झटका देते हुए राफेल लड़ाकू विमान खरीदने से इनकार कर दिया है। स्वीडन के ग्रिपेन E/F फाइटर जेट ने फ्रांसीसी राफेल को धूल चटा जी है। कोलंबिया पहले फ्रांस से राफेल खरीदने के लिए बात कर रहा था, लेकिन उसने कई वजहों से स्वीडिश जेट को चुनने का फैसला किया है। कोलंबिया और स्वीडन के बीच 14 नवंबर 2025 को समझौते पर साइन किए गये थे, लेकिन फ्रांस को उसके बाद भी राफेल की बिक्री को लेकर उम्मीदें थीं। लेकिन ताजा जानकारी के मुताबिक कोलंबिया ने आखिरकार राफेल को रेस से बाहर कर दिया है और उसने स्वीडिश जेट को कानूनी तौर पर पारदर्शी और फायदेमंद ऑफर माना है।

    कोलंबिया के कंट्रोलर जनरल (वित्तीय नियंत्रण के लिए जिम्मेदार विभाग, राज्य ऑडिटर) ने सरकार को अपना फैसला सौंप दिया है। आधिकारिक घोषणा में बताया गया है कि ऑडिट के दौरान, कोलंबिया और स्वीडन के बीच किए गये समझौते से संबंधित सभी डॉक्यूमेंट्स की जांच की गई, जिसमें वित्तीय और गोपनीय तकनीकी डॉक्यूमेंट्स शामिल थे। इसमें ग्रिपेन और राफेल के बीच मूल्यांकन किया गया था और ग्रिपेन के ऑफर को सबसे बेहतरीन कहा गया है।

    ग्रिपेन के मुकाबले रेस क्यों हार गया राफेल लड़ाकू विमान
    रिपोर्ट के मुताबिक कोलंबिया ने स्वीडन के साथ 17 नये ग्रिपेन लड़ाकू विमानों के लिए सौदा किया है। इसके तहत 15 सिंगर सीट ग्रिपेन E और 2 ट्विन-सीट ग्रिपेन F खरीदे जाने हैं। इन विमानों की टेक्निकल-ऑपरेशनल ट्रेनिंग, लॉजिस्टिक्स सपोर्ट और हथियारों की कीमत करीब 220 मिलियन डॉलर प्रति विमान होगी। दरअसल, कोलंबिया में इसी कीमत को लेकर बवाल भी हुआ था। इतनी ज्यादा कीमत का विमान होने की वजह से इस डील को जांच का सामना करना पड़ा।

    इस डील के लिए पेमेंट की शर्तों के मुताबिक कॉन्ट्रैक्ट की कीमत का 40% छह अलग-अलग एडवांस पेमेंट में 2026 से 2031 के बीच देना होगा। बाकी 60% रकम फाइटर जेट की डिलीवरी के समय 2028 से 2032 के बीच देनी होगी। रिपोर्ट के मुताबिक, ज्यादा कीमत होने के बावजूद फ्रांस, कोलंबिया को राफेल के किसी भी कंपोनेंट का टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के लिए तैयार नहीं था। लेकिन स्वीडन के साथ समझौता करने से कोलंबोयि का सेंसर, एवियोनिक्स, हथियार, कीमत, इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ कई अहम टेक्नोलॉजी ट्रांसफर मिल रहे थे।

    अमेरिका से क्यों डर रहा कोलंबिया
    इस आकलन में कोलंबिया के लिए राफेल से ज्यादा ग्रिपेन फाइटर जेट फायदेमेंद साबित हो रहा था। लेकिन कोलंबिया के लिए ये डील भी आसान नहीं होने वाला है। क्योंकि स्वीडिश हथियार कंपनी SAAB, जो ग्रिपेन लड़ाकू विमान बनाती है, वो इस विमान के लिए कई क्रिटिकल कंपोनेंट अमेरिका से मंगवाती है और चूंकी डोनाल्ड ट्रंप के कोलंबिया से संबंध खराब हो गये हैं, ऐसे में आशंका है कि अमेरिका, कोलंबिया को विमान बेचने पर वीटो भी लगा सकता है, जिससे इस विमान का सौदा नहीं हो पाएगा।

    728 x 90 Advertisement
    728 x 90 Advertisement
    300 x 250 Advertisement

    हर महीने  ₹199 का सहयोग देकर आज़ाद हिन्द न्यूज़ को जीवंत रखें। जब हम आज़ाद हैं, तो हमारी आवाज़ भी मुक्त और बुलंद रहती है। साथी बनें और हमें आगे बढ़ने की ऊर्जा दें। सदस्यता के लिए “Support Us” बटन पर क्लिक करें।

    Support us

    ये आर्टिकल आपको कैसा लगा ? क्या आप अपनी कोई प्रतिक्रिया देना चाहेंगे ? आपका सुझाव और प्रतिक्रिया हमारे लिए महत्वपूर्ण है।