• Religion
  • क्या है ब्रह्म पात्र और नागा साधुओं से क्या है इसका संबंध

    नागा साधु ओं के अनुसार ब्रह्मा जी ने इस पात्र का सृजन किया है, ब्रह्मपात्र को प्रकृति ने तीखा कर दिया है, ताकि इस ब्रह्मपात्र तुंबा को कोई गाय इत्यादि न खा सके। नागा साधु अपने ब्रह्म पात्र को अत्यन्त पवित्र मानते हैं, वे इस पात्र को कभी भी अशुद्ध स्थान पर नहीं रखते। सोते


    Azad Hind Desk अवतार
    By Azad Hind Desk फरवरी 5, 2026
    Views
    728 x 90 Advertisement
    728 x 90 Advertisement
    300 x 250 Advertisement
    नागा साधु ओं के अनुसार ब्रह्मा जी ने इस पात्र का सृजन किया है, ब्रह्मपात्र को प्रकृति ने तीखा कर दिया है, ताकि इस ब्रह्मपात्र तुंबा को कोई गाय इत्यादि न खा सके। नागा साधु अपने ब्रह्म पात्र को अत्यन्त पवित्र मानते हैं, वे इस पात्र को कभी भी अशुद्ध स्थान पर नहीं रखते। सोते समय वे ब्रह्म पात्र को अपने सिरहाने रखते हैं या अपने त्रिशूल अथवा डंडे पर टांग देते हैं।

    ब्रह्मा जी का आशीर्वाद है यह ब्रह्मपात्र
    मान्यता है कि यदि ब्रह्म पात्र टूट जाए, तो यह एक बुरा संकेत होता है और साधु को इसका प्रायश्चित करना पड़ता है या विधि-विधान से दूसरा पात्र धारण करना पड़ता है। नागा साधु और अन्य सन्यासीगण इस तुंबे या कमंडल को ब्रह्म पात्र कहते हैं। उनके लिए जीवन में इसका स्थान केवल एक पात्र न होकर एक पवित्र साथी की तरह है। सन्यासियों का मानना है कि यह तुंबा, ब्रह्मांड का प्रतीक है। जैसे ब्रह्मा जी सृष्टि के रचयिता हैं और यह पूरा ब्रह्मांड एक पात्र की तरह है जिसमें जीवन पनपता है, वैसे ही यह तुंबा भी जीवन देने वाले जल को धारण करता है।

    क्या है ब्रह्म पात्र की खासियत
    नागा साधु दिगंबर (वस्त्रहीन) रहते हैं और उनके पास भौतिक संपत्ति के नाम पर कुछ नहीं होता, ऐसे में यह ब्रह्म पात्र ही उनकी एकमात्र अलमारी या तिजोरी है। नागा साधु जब भिक्षा मांगने के लिए निकलते हैं, तो वे इसी पात्र में भोजन ग्रहण करते हैं और इसी में पानी पीते हैं। इसकी खासियत यह है कि इसमें रखा पानी प्राकृतिक रूप से शुद्ध रहता है।

    नागा साधु ब्रह्म पात्र क्यों रखते हैं अपने साथ
    माना जाता है कि तुम्बा पात्र में रखा पानी पेट के लिए बहुत लाभकारी होता है। यह पानी को क्षारीय बनाता है, जो साधुओं को कठिन तपस्या के दौरान स्वस्थ रखने में मदद करता है। स्नान के दौरान या नदियों को पार करते समय, यह हल्का तुंबा नदी को पार करने में मदद करता है, इसे पकड़कर साधु आसानी से पानी में तैर सकते हैं, क्योंकि यह कभी डूबता नहीं है।

    728 x 90 Advertisement
    728 x 90 Advertisement
    300 x 250 Advertisement

    हर महीने  ₹199 का सहयोग देकर आज़ाद हिन्द न्यूज़ को जीवंत रखें। जब हम आज़ाद हैं, तो हमारी आवाज़ भी मुक्त और बुलंद रहती है। साथी बनें और हमें आगे बढ़ने की ऊर्जा दें। सदस्यता के लिए “Support Us” बटन पर क्लिक करें।

    Support us

    ये आर्टिकल आपको कैसा लगा ? क्या आप अपनी कोई प्रतिक्रिया देना चाहेंगे ? आपका सुझाव और प्रतिक्रिया हमारे लिए महत्वपूर्ण है।