सुमित्रा ने बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल और पेशेवर जिम्मेदारियों के बीच उलझे लोगों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत में 2026 में सबसे अधिक युवा शक्ति होने के बावजूद, वरिष्ठ नागरिकों की संख्या 14.9 करोड़ से अधिक हो गई है। उन्होंने कहा कि 2036 तक यह आंकड़ा 23 करोड़ से ऊपर पहुंच जाएगा और जल्द ही हर तीसरा भारतीय बुजुर्ग होगा।
सुमित्रा ने कहा कि तेजी से हो रहे शहरीकरण और रोजगार के अवसरों ने करोड़ों युवाओं को उनके घरों से दूर कर दिया है, जिससे उनके माता-पिता अकेले रह गए हैं। उन्होंने कहा जब हर घर में बुजुर्गों को चिकित्सा देखभाल की जरूरत होती है, तो किसी व्यक्ति – पुत्र या पुत्री – की मौजूदगी बहुत जरूरी होती है। लेकिन उन्हें ऑफिस से छुट्टी लेने में कठिनाई होती है और अक्सर छुट्टी नहीं मिल पाती।
सुमित्रा ने सरकार से अनुरोध किया कि सरकारी और प्राइवेट दोनों में वरिष्ठ नागरिकों यानी 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों की देखभाल के लिए 45 दिन की छुट्टी प्रदान की जाए। उन्होंने कहा, जैसे माता अपने बच्चे को 20 साल देते हैं उसी तरह पुत्र या पुत्री को भी बीमार माता-पिता की देखभाल के लिए अवकाश मिलना चाहिए।













