पीर पंजाल क्षेत्र को समझते हैं, यह कहां है
पीर पंजाल क्षेत्र पीर पंजाब पर्वतमाला से जुड़ा है, जो उत्तरी भारतीय उपमहाद्वीप के पश्चिमी हिमालय में स्थित निचले हिमालयी क्षेत्र की एक पर्वत श्रृंखला है। यह ब्यास और नीलम-किशनगंगा नदियों के बीच दक्षिण-पूर्व से उत्तर-पश्चिम की ओर फैली हुई है।
यह पूरा क्षेत्र हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में स्थित है। इसका उत्तर-पश्चिमी छोर पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में भी है। इन्हीं इलाकों से ब्यास, रावी, झेलम और चेनाब नदियां बहती हैं। राजनीतिक रूप से राजौरी-पुंछ जिलों को पीर पंजाल और रामबन-डोडा-किश्तवाड़ जिलों को चेनाब रीजन कहा जा रहा है।
कैसे पड़ा पीर पंजाल नाम, यह जानिए
पीर पंजाल पर्वतमाला का नाम पीर पंजाल दर्रे के नाम पर रखा गया है, जिसका मूल नाम कश्मीर के राजा श्रीवर की ओर से कश्मीर पर लिखे 12वीं सदी के कवि कल्हण के ऐतिहासिक ग्रंथ राजतरंगिणी में दर्ज किया गया। यह तीसरी राजतरंगिणी थी। विद्वान एमए स्टाइन का मानना है कि इस क्षेत्र के इस्लामीकरण के बाद देवता की अवधारणा को पीर की अवधारणा में बदल दिया गया होगा। बाद में इसे किसी पीर से जोड़ दिया गया।
पीर पंजाल: किस बात को लेकर हुआ विवाद
दरअसल, सुनील शर्मा ने नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी पीर पंजाल क्षेत्र में स्थापित किए जाने की मांग पर कहा था-‘मुझे नहीं पता कि यह पीर पंजाल खित्ता कौन सा है।’ इस पर विधानसभा में हंगामा बरपा हो गया।
भाजपा विधायकों ने कहा कि कौन सा पीर पंजाल क्षेत्र। पूरा जम्मू-कश्मीर एक है। क्षेत्रवाद के नाम पर लोगों को बांटने की साजिश हो रही है। वहीं, कांग्रेस ने भाजपा से माफी मांगने को कहा।
कैसे उठा यह विवाद, किसने फैलाया ‘रायता’
टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह विवाद तब उठा जब पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने राजौरी और पीर पंजाल के पुंछ के साथ-साथ चेनाब घाटी के जिलों को मिलाकर एक अलग प्रशासनिक प्रभाग बनाने की मांग की।
उनकी इस मांग के कुछ हफ्तों बाद यह विवाद सामने आया है। महबूबा ने दूरस्थता, पहाड़ी भूभाग और बुनियादी ढांचे की कमी का हवाला देते हुए यह मांग रखी थी, जिसका भाजपा ने विरोध किया था।
क्या है पीर-पंजाल क्षेत्र के लोगों की शिकायत
यह क्षेत्र कश्मीर घाटी के दक्षिण में और नियंत्रण रेखा (LOC) के निकट पीर पंजाल पर्वतमाला के साथ स्थित पहाड़ी पट्टी से जुड़ा है। चेनाब घाटी में डोडा, किश्तवाड़ और रामबन शामिल हैं। ये सभी ऊबड़-खाबड़ जिले चेनाब नदी द्वारा तराशे गए हैं। राजौरी और पुंछ जिले अक्सर शिकायत करते हैं कि विकास, प्रतिनिधित्व और प्रशासनिक ध्यान के मामले में जम्मू डिवीजन और कश्मीर घाटी के बीच उन्हें दरकिनार कर दिया जाता है।
भाजपा का क्या है पीर-पंजाल पर रुख
यह विवाद बीते मंगलवार को तब शुरू हुआ जब किश्तवाड़ जिले के पद्दर-नागसेनी का प्रतिनिधित्व करने वाले शर्मा ने पीर पंजाल में प्रस्तावित राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय की स्थापना के बारे में पूछे गए एक प्रश्न का उत्तर दिया। उन्होंने कहा कि ऐसा कोई क्षेत्र नहीं है और उन्होंने यह नाम ‘किसी भी शब्दकोश’ में नहीं सुना है।
बाद में उन्होंने आरोप लगाया कि यह शब्द क्षेत्रीय दलों की एक राजनीतिक साजिश का हिस्सा है, जो उनके अनुसार ‘ग्रेटर कश्मीर’ की अवधारणा को बताता है, जिसे भाजपा स्वीकार नहीं करेगी।
सत्तारूढ़ विधायकों ने क्यों कहा माफी मांगे
शर्मा की टिप्पणियों से राजौरी और पुंछ के विधायकों ने विरोध प्रदर्शन किया, जिनमें उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी और वन मंत्री जावेद राणा भी शामिल थे, जो दोनों इसी क्षेत्र से हैं। उन्होंने माफी की मांग की। शर्मा ने माफी मांगने से इनकार कर दिया। राजौरी जिले के थानामंडी से निर्दलीय विधायक मुजफ्फर इकबाल खान ने कहा कि शर्मा के बयान से जनभावना को ठेस पहुंची है।
उन्होंने कहा-यह न केवल पीर पंजाल का अपमान है, बल्कि चेनाब घाटी के किश्तवाड़ और डोडा का भी अपमान है। हम सीमावर्ती क्षेत्र के लोग हैं। हमने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी बलिदान दिए हैं। अकेले पुंछ शहर में ही 16 लोग शहीद हुए थे। उन बलिदानों का अपमान किया गया है।













