क्या निकला एक्सपेरिमेंट का नतीजा?
इस टेस्ट के लिए हमने एक ऐपल का चार्जल लिया था, जिसमें एक Sandisk की टाइप सी पोर्ट वाली पेन ड्राइव को लगाकर चेक किया गया। बता दें कि 256 GB वाली उस पेन ड्राइव में 50GB से ज्यादा डेटा मौजूद था। इसके बाद जैसे ही पेन ड्राइव को चार्जर में लगाकर स्विच को ऑन किया, न किसी तरह की आवाज आई और न ही पेन ड्राइव में किसी तरह की हरकत देखने को मिली।
इसके बाद हमने पेन ड्राइव को कंप्यूटर पर लगाकर चेक किया। हमने पाया कि पेन ड्राइव में मौजूद डेटा किसी भी तरह से प्रभावित नहीं हुआ था। वहीं हमारा चार्जर भी पहले की तरह ही काम कर रहा था। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर ये हुआ क्या?
आखिर Pen Drive को कुछ हुआ क्यों नहीं?
हमारे एक्सपेरिमेंट में Pen Drive या चार्जर को इसलिए कुछ नहीं हुआ क्योंकि USB की दुनिया दो हिस्सों में बंटी है। एक पावर डिलीवरी और दूसरा डेटा ट्रांसफर। आर इसे कुछ इस तरह समझें कि चार्जर सिर्फ बिजली के सिग्नल भेजता है, डेटा के नहीं। जब तक आप Pen Drive को किसी ऐसे डिवाइस में नहीं लगाएंगे, जो डेटा को पढ़ सके तब तक पेनड्राइव का कंट्रोलर न्यूट्रल मोड में रहता है। इसका मतल है कि पेन ड्राइव में बिजली तो पहुंचती है लेकिन फाइलें कहीं नहीं जातीं।
और आसान भाषा में कहें, तो पेन ड्राइव को चार्जर में लगाने से पेन ड्राइव को कोई असर नहीं पड़ता। ऐसा इसलिए क्योंकि पेन ड्राइव के लिए चार्जर से कनेक्ट होना या न होना दोनों ही एक बराबर है। ऐसा करने पर जिज्ञासा शांत होने के अलावा कुछ और नहीं होता।
कब हो सकता है नुकसान
हमारे एक्सपेरिमेंट से यह न समझें कि आप किसी भी चार्जर में पेन ड्राइव घुसा कर चेक कर सकते हैं। अगर आपकी ड्राइव गीली हो या चार्जर नकली हो, तो ऐसे में आपके डिवाइस या डेटा को नुकसान हो सकता है। इस तरह का कोई एक्सपेरिमेंट हो या नॉर्मल लाइफ, हमें ब्रैंडेड पेन ड्राइव और चार्जर ही इस्तेमाल करने चाहिए।













