पाकिस्तान हर साल करीब 400 मिलियन डॉलर की लागत से वैक्सीन खरीदता है। जिसमें से 49 प्रतिशत GAVI के जरिए काम करने वाले इंटरनेशनल ऑर्गनाइजेशन कवर करते हैं, जबकि बाकी 51 प्रतिशत खर्च सरकार को उठाना पड़ता है। पाकिस्तान के स्वास्थ्य विभाग से जुड़े सीनियर अधिकारियों का कहना है कि अगर पाकिस्तान में वैक्सीन का स्थानीय उत्पादन शुरू नहीं होता है तो साल 2031 तक सालाना खर्च 1.2 अरब डॉलर से ज्यादा हो जाएगा। वहीं, स्वास्थ्य मंत्री मुस्तफा कमाल ने कहा है कि वैक्सीन देने के लिए अंतर्राष्ट्रीय मदद 2031 तक खत्म हो जाएगा।
भारत से वैक्सीन खरीदना बंद करने का असर क्या हुआ
दरअसल, पाकिस्तान पारंपरिक रूप से GAVI के जरिए इम्यूनाइजेशन के लिए सस्ती वैक्सीन खरीदता रहा है, जो भारत से आती थीं। दोनों देशों के बीच तनावपूर्ण संबंध होने के बावजूद GAVI लागू रहीं और कोविड संकट के दौरान भी GAVI के जरिए ही भारतीय वैक्सीन पाकिस्तान भेजी गईं। भारतीय फार्मास्युटिकल कंपनियों ने GAVI के जरिए सस्ती और अच्छी अच्छी क्वालिटी की वैक्सीन पाकिस्तान को उपलब्ध करवाई। लेकिन पिछले साल मई महीने में संघर्ष के बाद भारत से होने वाली सप्लाई बंद हो गई है।
पाकिस्तान की सरकार अपने नागरिकों को कुल 13 तरह की वैक्सीन उपलब्ध करवाती है, लेकिन इनमें से एक भी वैक्सीन देश में नहीं बनती है। जबकि देश की आबादी लगातार बढ़ रही है। पाकिस्तान दुनिया का पांचवां सबसे ज्यादा आबादी वाला देश है, जिसकी आबादी करीब 24 करोड़ है। पाकिस्तान में हर साल करीब 62 लाख बच्चे पैदा होते हैं, जिन्हें वैक्सीन की जरूरत होती है, इसलिए देश में वैक्सीन की डिमांड लगातार बढ़ती रहती है। पाकिस्तानी स्वास्थ्य मंत्री ने बताया है कि पाकिस्तान अब आत्मनिर्भर बनने के लिए सऊदी अरब के साथ स्थानीय स्तर पर वैक्सीन बनाने की पार्टनरशिप पर विचार कर रहा है।













