हाल ही में सिद्धार्थ कन्नन के साथ बातचीत में राजू श्रेष्ठ ने 1972 में आई फिल्म ‘बावर्ची’ का किस्सा सुनाया। इस फिल्म में वो राजेश खन्ना के साथ एक चाइल्ड आर्टिस्ट के तौर पर नजर आए थे। अब करीब 54 साल बाद इस फिल्म के सेट पर राजेश खन्ना और जया के बीच हुई लड़ाई का किस्सा उन्होंने शेयर किया है।
राजेश खन्ना ने जया से अमिताभ बच्चन के बारे में कुछ आपत्तिजनक कह दिया
राजेश खन्ना के नखरे और अहंकार के भी किस्से राजू ने सुनाए। राजेश खन्ना को अक्सर भारत का पहला सुपरस्टार कहा जाता है, जिन्होंने अपने टैलेंट के दम पर स्टारडम हासिल किया। हालांकि, इसके बाद लगातार कई फिल्में फ्लॉप हुईं और फिर वो अधिकांश घर पर अकेले शराब में डूबे रहने लगे थे। राजू ने बताया कि दोनों के बीच झगड़ा तब शुरू हुआ जब खन्ना ने जया से अमिताभ बच्चन के बारे में कुछ आपत्तिजनक कह दिया था।
‘दोनों के बीच एक बहस हुई थी और शूटिंग रोक दी गई’
उन्होंने कहा, ‘दोनों के बीच एक बहस हुई थी और शूटिंग रोक दी गई थी। मुझे बस इतना ही याद है क्योंकि बावर्ची बहुत पुरानी फिल्म है। हालांकि वो झगड़ा अमिताभ बच्चन को लेकर हुआ था। जया जी अमित जी की दोस्त थीं और अमिताभ भी ऋषि कपूर के करीबी थे और उनके साथ एक फिल्म कर रहे थे। राजेश खन्ना की अपनी समस्या थी।’
अमिताभ बच्चन बहुत मजबूती से आगे बढ़ रहे थे
राजू ने बताया कि राजेश खन्ना को ये बात पसंद नहीं थी कि उस समय अमिताभ बच्चन तेजी से सफलता हासिल कर रहे थे और उनके ‘पहले सुपरस्टार’ के दर्जे को चुनौती दे रहे थे। उन्होंने बताया कि राजेश खन्ना नहीं चाहते थे कि कोई उनकी जगह ले और तब के समय में अमिताभ बच्चन बहुत मजबूती से आगे बढ़ रहे थे। इसे लेकर ही राजेश खन्ना ने जया जी से अमिताभ बच्चन के खिलाफ कुछ कहा और यहीं से दोनों के बीच झगड़ा शुरू हुआ और आखिरकार शूटिंग रोक दी गई।
राजेश खन्ना को टक्कर देते हुए सुपरस्टार बने थे अमिताभ
यहां बताना चाहेंगे कि साल 1973 में अमिताभ बच्चन की फिल्म ‘जंजीर’ आई थी और इसी के बाद से सिनेमाघरों में उन्हें लेकर दर्शकों में जबरदस्त क्रेज दिखने लगा था। ‘शोले’, ‘दीवार’ और ‘नमक हराम’ जैसी फिल्मों के साथ अमिताभ ने राजेश खन्ना को टक्कर देते हुए उस दौर के सुपरस्टार का दर्जा हासिल कर लिया था।
‘आनंद’ के लिए अमिताभ को मिला था बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का अवॉर्ड
यहां ये भी बता दें कि अमिताभ बच्चन और राजेश खन्ना नेदो क्लासिक फिल्मों में साथ काम किया है। इनमें से एक ‘आनंद’ (1971) और दूसरी थी ‘नमक हराम’ (1973)। ये दोनों फिल्मों का निर्देशन ऋषिकेश मुखर्जी द्वारा निर्देशित थीं। फिल्म आनंद में अमिताभ बच्चन ने उनके डॉक्टर की भूमिका निभाई, जिसके लिए उन्हें बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला।













