सरकार पर किया कटाक्ष
उन्होंने सदन में केंद्रीय बजट पर सामान्य चर्चा की शुरूआत करते हुए मिर्जा गालिब के एक मशहूर शेर का उल्लेख करते हुए सरकार पर कटाक्ष किया कि ”हम को मालूम है जन्नत की हकीकत लेकिन दिल के खुश रखने को ‘गालिब’ ये खयाल अच्छा है। उन्होंने आगे कहा कि इस साल के बजट को देखकर प्रतीत होता है कि कार में एयर बैग को ‘रीअरेंज’ कर दिया गया है ताकि उसमें बैठे यात्री सुरक्षित महसूस करें।
कांग्रेस सांसद ने मीडिया रिपोर्ट्स का दिया हवाला
कांग्रेस नेता ने दावा करते हुए कहा कि बजट में बेरोजगारी को नजरअंदाज किया गया, रहन-सहन पर खर्च और असमानता की अनदेखी की गई है। आम आदमी के संघर्ष पर कोई ध्यान नहीं दिया गया है। उन्होंने मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि पिछले बजट में 53 बड़ी कल्याणकारी योजनाओं के लिए पांच लाख करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान किया गया लेकिन वित्त वर्ष के पहले नौ महीनों में केवल 41 प्रतिशत ही खर्च किया गया।
यह शासन नहीं, हेडलाइन मैनेजमेंट
उन्होंने विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के लिए आवंटित राशि का बड़ा हिस्सा खर्च नहीं किए जाने पर कटाक्ष करते हुए कहा कि यह शासन नहीं, हेडलाइन मैनेजमेंट है। थरूर ने कृषि क्षेत्र पर बजट में ध्यान नहीं दिये जाने का आरोप लगाते हुए कहा कि हमारे किसानों की आय दोगुनी करने का वादा आपसे पूरा तो हो नहीं पाया, कम से कम उनकी ‘सम्मान निधि’ तो बढ़ा दीजिए।
बेरोजगारी बढ़ना जारी नौकरियां कम
पिछले छह साल से यह (प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि) केवल छह हजार रूपये पर अटकी हुई है। उन्होंने 2047 तक विकसित भारत बनाने के नरेन्द्र मोदी सरकार के लक्ष्य को सराहनीय बताया, हालांकि इस दिशा में बजट में किसी विश्वसनीय पथ पर आगे नहीं बढ़ने का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बेरोजगारी का बढ़ना जारी है। नौकरियां कम हो गई हैं। राहत पाने के लिए पहले से जद्दोजहद कर रहे छोटे कारोबार नियमों के अनुपालन के विभिन्न चरण में फंस गए हैं।
गिग वर्कर हमारी नई अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी
अनौपचारिक श्रमिकों और गिग वर्कर को अनिश्चिता एवं असुरक्षा की स्थिति में धकेल दिया गया है। कांग्रेस सांसद ने कहा कि गिग वर्कर हमारी नई अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी हैं। लेकिन बजट में उनका कोई जिक्र नहीं है।” थरूर ने कहा कि डेढ़ लाख से अधिक स्कूलों में बिजली आपूर्ति नहीं है। उन्होंने कहा, ”असल में विकसित भारत नारों, भाषणों या प्रतीकों से नहीं बनेगा, बल्कि भारत के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचने से बनेगा।” भाषा सुभाष













