सोमवती अमावस्या कब है?
पंचांग के अनुसार, अमावस्या तिथि 16 फरवरी, सोमवार के दिन शाम को 5 बजकर 35 मिनट पर शुरू होगी। वहीं, अगले दिन यानी 17 फरवरी, मंगलवार को शाम के 5 बजकर 31 मिनट तक अमावस्या तिथि व्याप्त रहेगी। क्योंकि 16 तारीख सोमवार को सूर्यास्त से पहले अमावस्या तिथि लग रही है, ऐसे में सोमवती अमावस्या का व्रत इस दिन मान्य होगा। वहीं, अगले दिन मंगलवार को भी अमावस्या तिथि व्याप्त रहने के चलते इस दिन भौमवती अमावस्या का संयोग बनेगा। शास्त्रों के अनुसार, अगर सूर्यास्त से पूर्व एक घड़ी भी सोमवार को हो तो उसे सोमवती अमावस्या कहा जाएगा। ऐसे में 16 तारीख को व्रत रखना शास्त्र सम्मत होगा।
सोमवती अमावस्या 2026 शुभ मुहूर्त
इस बार सोमवती अमावस्या का व्रत 16 फरवरी, सोमवार को रखा जाएगा। वहीं, अमावस्या पर स्नान दान का शुभ मुहूर्त अगले दिन यानी 17 फरवरी, मंगलवार को सुबह का रहेगा। इसके अलावा, 17 तारीख को पितरों को प्रसन्न करने, उनका आशीर्वाद प्राप्त करने और पितृ दोष से जुड़े उपाय दोपहर के समय किए जा सकते हैं। सोमवती अमावस्या पर पवित्र नदी में स्नान दान करने का बहुत अधिक महत्व होता है। इससे जातक को बेहद पुण्य फल की प्राप्ति हो सकती है।
सोमवती अमावस्या 2026 पूजा विधि
- अमावस्या तिथि पर सुबह जल्दी उठकर स्नानादि करने के बाद भगवान शिव और माता पार्वती के मंदिर जाकर वहां विधि-विधान से पूजा करनी चाहिए।
- शिवलिंग और माता पार्वती की प्रतिमा पर 7 अथवा 11 बार विषम संख्या में कच्चा सूत लपेटें। ऐसा करने से दांपत्य जीवन सुखद बना रहता है।
- व्रती को इस दिन सुबह स्नानादि के बाद साफ वस्त्र धारण करके पहले व्रत का संकल्प लेना चाहिए। इसके पश्चात, एक लकड़ी की चौकी पर वस्त्र बिछाकर वहां शिवजी और मां पार्वती की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
- माता पार्वती और भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा व आरती करने के पश्चात इस दिन पीपल के पेड़ की 108 बार परिक्रमा अवश्य करनी चाहिए।
- परिक्रमा करने का साथ-साथ 108 बार धागा लपेटें और वृक्ष में शिवजी की वास मानकर दूध, जल, चंदन, अक्षत आदि से वृक्ष की पूजा करें।













