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  • चिकेन नेक पर नया संकट? बांग्‍लादेश में जमात-ए-इस्लामी ने भारतीय सीमा के पास 51 सीटें जीतीं, खतरे की घंटी?

    ढाका/नई दिल्ली: बांग्लादेश चुनाव में जमात ए इस्लामी ने कुल 68 सीटें जीती हैं, जिनमें से 51 सीटें ऐसी हैं, जो भारत की सीमा से लगने वाले क्षेत्रों में है। हालांकी जमात के अमीर शफीकुर रहमान ने वादा किया था कि उनका संगठन भारत के साथ दोस्ताना रिश्ते बनाएगा। लेकिन यह एक सोच-समझकर बनाया गया


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    By Azad Hind Desk फरवरी 14, 2026
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    ढाका/नई दिल्ली: बांग्लादेश चुनाव में जमात ए इस्लामी ने कुल 68 सीटें जीती हैं, जिनमें से 51 सीटें ऐसी हैं, जो भारत की सीमा से लगने वाले क्षेत्रों में है। हालांकी जमात के अमीर शफीकुर रहमान ने वादा किया था कि उनका संगठन भारत के साथ दोस्ताना रिश्ते बनाएगा। लेकिन यह एक सोच-समझकर बनाया गया बयान था जो घरेलू और क्षेत्रीय राजनीति को ध्यान में रखकर तैयार किया गया था। जिसके तहत जमात, भारत को अहमियत देना चाहता था। बांग्लादेश में चुनाव से एक दिन पहले शफीकुर रहमान ने एक भारतीय न्यूज चैनल को इंटरव्यू दिया था, इसमें उन्होंने कहा था कि “भारत हमारा सबसे करीबी पड़ोसी है। यह हमारी प्राथमिकता है।”

    लेकिन बांग्लादेश चुनाव में जमात-ए-इस्लामी को मिली 51 सीटों पर नजर डालें तो पता चलता है कि वो सीटें भारत के सीमावर्ती जिलों के आसपास हैं। खासकर पश्चिम बंगाल, असम, मेघालय और त्रिपुरा के लिए चिंताजनक स्थिति बन सकती है। दरअसल, जमात पिछले कई सालों से इन जिलों में “चुपके से” काम कर रही है। जमात के इस ट्रेंड को अवामी लीग के अनुभवी नेता भी नहीं समझ पाए। जिन्होंने “गलत” पॉलिसी फैसलों के जरिए इस्लामी ताकतों को फिर से खड़ा करने का रास्ता बनाया था।

    जमात ने सीमावर्ती क्षेत्रों में जीती 51 सीटें
    निलफामारी (4), रंगपुर (6), कुरीग्राम (4), गैबांधा (4), चपैनवाबगंज (3), नागांव (1), राजशाही (2), कुश्तिया (3), चुआडांगा (2), झेनैदा (3), जेसोर (4), खुलना (2), सतखीरा (4), मेहरपुर (2), शेरपुर (1), मैमनसिंग (2), सिलहट (1), नोआखली (1) और चटगांव (2) में वोटों की गिनती से पता चलता है कि इन बॉर्डर जिलों में जमात की पकड़ काफी मजबूत हुई है। नॉर्थ ईस्ट आई की रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय सुरक्षा विश्लेषक फिलहाल जमात को मिली सीटों का विश्लेषण कर रहे हैं और स्थिति को समझने की कोशिश कर रहे हैं।

    लेकिन चिंताजनक बात ये है कि पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा और असम के सामने बांग्लादेश के बॉर्डर जिलों में कट्टरपंथी इस्लामी ग्रुप और संगठन कुछ समय से राजनीतिक पैठ बना रहे हैं। सबसे गंभीर तस्वीर पश्चिम बंगाल के करीब वाले बांग्लादेशी जिलों (सतखीरा, झेनैदाह, जेसोर, चपैनवाबगंज, कुरीग्राम, गैबांधा, कुश्तिया और राजशाही) में उभरती है, जहां मुर्शिदाबाद, मालदा, उत्तर 24 परगना, सिलीगुड़ी और कोच बिहार जैसे जिलों में मुस्लिम आबादी में काफी मुखर और हिंसक राजनीति का ट्रेंड काफी बढ़ गया है। ढाका के राजनीतिक विश्लेषकों का आकलन है कि सरहदी क्षेत्रों में जमात की जीत की एक बड़ी वजह ये है कि उन क्षेत्रें में बंटवारे के बाद भारत से आने वाले मुसलमान हैं। उनके वंशज जमात को वोट कर रहे हैं और उनकी आबादी में तेजी से इजाफा हुआ है।

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