मोदी ने पैरिस में पिछले साल दिए अपने भाषण में कहा था कि गवर्नेस का अर्थ लोगों को पहुंच देने का भी है। खासतौर से उन्होंने इस संबंध में ग्लोबल साउथ का जिक्र किया था। पीएम ने कहा था कि चाहे ये पहुंच कंप्यूटिंग पावर, टैलंट, डेटा किसी क्षेत्र में क्यों ना हो। ऐसे में AI इंपैक्ट समिट 2026 में भारत ने जिन 7 चक्रों को इस समिट का आधार बनाया गया है, वे ग्लोबल साउथ और समावेशी विकास को सामने रखते हैं। ये G 20 की तर्ज पर ही भारत के नरेटिव को दिशा देते है।
ध्यान रखने वाली बात ये भी है कि इससे पहले जितनी भी समिट हुई है, चाहे वो ब्रिटेन, पैरिस या फिर कोरिया में, उनमें पश्चिमी देशों का फोकस सुरक्षा और सेफ्टी को लेकर ही रहा, लेकिन ग्लोबल साउथ में पहली बार हो रही इस समिट में समिट का फोकस सेफ्टी से हटकर मानव केंद्रित विकास पर आ गया है।
G 20 की तर्ज पर ही घोषणापत्र पर नजर
भारत AI के क्षेत्र में महत्वाकांक्षी है, लेकिन भारत हमेशा से ही समावेशी और एथिकल AI की बात करता रहा है। ऐसे में भारत AI के जिस तरह के विजन को सामने रख रहा है, उसे दुनिया की ओर से भी समझने की कोशिश हो रही है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटारेस ने अपने हाल के बयान में ये कहा भी है कि इस समिट के लिए भारत सबसे उपयुक्त जगह है। ऐसे में भारत खुद को उभरती इकॉनमी, इमर्जिंग टेक्नॉलजी का हब और सबको साथ लेकर चलने वाले देश की तरह दिखाना चाहता है। जानकार मान रहे है कि जिस तरह दुनिया के देशों ने G-20 के दिल्ली घोषणापत्र पर आम सहमति जताई थी उसी तरह इस बार उम्मीद है कि सभी देश ग्लोबल AI विजन के एजेंडे पर भारत के परिप्रेक्ष्य को समझेंगे।
आने वाला वक्त AI डिप्लोमेसी का
- दुनिया अब धीरे धीरे ऐसे वक्त में पहुंच रही है, जहां AI के विकास के लिए इस्तेमाल होने वाले चिप और क्रिटिकल मिनरल्स पर कंट्रोल रणनीतिक हथियार बनते जा रहे है।
- AI ना सिर्फ इकॉनमी, बल्कि गवर्नेंस के सिस्टम, पब्लिक सर्विसेस और अंतर्राष्ट्रीय संबंधों को प्रभावित कर रहा है। ऐसे में AI वैल्यू चेन, डेटा सेंटर्स के हब बनने वाले देशों के पास पहले AI इकोसिस्टम के लिहाज एक अग्रणी पोजिशन पहले से ही होगी।
- भारत का एआई समिट एआई इकोसिस्टम में गैरबराबरी को पाटने में मददगार साबित हो सकता है, जिससे भारत की छवि ग्लोबल साउथ के अघोषित अगुवा के तौर पर और पुख्ता होती है













