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  • डोनाल्ड ट्रंप को खुश करें या पाकिस्‍तान को बचाएं, गाजा में सैनिक भेजने पर कैसे बुरे फंसे असीम मुनीर? जानें

    इस्लामाबाद: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की गाजा के लिए बनाई जा रही इंटरनेशनल स्टैबिलाइजेशन फोर्स (ISF) में हिस्सेदारी पर पाकिस्तान फंसता नजर आ रहा है। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन गाजा के लिए आईएसएफ की डिटेल जारी करने जा रहा है। दूसरी ओर पाकिस्तान घर में विरोध के डर से इस पर अपना रुख साफ करने की


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    By Azad Hind Desk फरवरी 16, 2026
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    इस्लामाबाद: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की गाजा के लिए बनाई जा रही इंटरनेशनल स्टैबिलाइजेशन फोर्स (ISF) में हिस्सेदारी पर पाकिस्तान फंसता नजर आ रहा है। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन गाजा के लिए आईएसएफ की डिटेल जारी करने जा रहा है। दूसरी ओर पाकिस्तान घर में विरोध के डर से इस पर अपना रुख साफ करने की स्थिति में नहीं है। पाकिस्तान आर्मी चीफ असीम मुनीर और पीएम शहबाज शरीफ यह नहीं बता रहे हैं कि उनके फौजी आईएसफ में शामिल होंगे या इससे बाहर रहेंगे।

    डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को कहा कि नए बने बोर्ड ऑफ पीस के मेंबर देशों ने पहली समिट से पहले कर्मियों को भेजने का वादा किया है। पाकिस्तान उन देशों में शामिल है, जो बोर्ड के गठन के समय मौजूद था। इसके बावजूद इस्लामाबाद से ISF में हिस्सेदारी पर पक्ष साफ नहीं किया जा रहा है। पाकिस्तानी अफसर इस पर बयानबाजी में बहुत एहतियात बरतते दिखे हैं।

    वॉशिंगटन में होनी है बैठक

    बोर्ड ऑफ पीस की पहली फॉर्मल मीटिंग 19 फरवरी को वाशिंगटन में होनी है। इसी दौरान डोनाल्ड ट्रंप की ओर से गाजा के लिए अरबों डॉलर का रिकंस्ट्रक्शन ब्लूप्रिंट पेश करने और स्टेबिलाइजेशन फोर्स के स्ट्रक्चर और मैंडेट की आउटलाइन देने की संभावना है। इस समिट में पाक पीएम शहबाज शरीफ के शामिल होने की बात कही जा रही है।

    शहबाज शरीफ के डोनाल्ड ट्रंप के साथ बोर्ड ऑफ पीस की बैठक में जाने का संकेत इस्लामाबाद के सियासी गलियारों से मिल रहा है। दूसरी ओर गाजा में पाकिस्तानी सैनिकों की तैनाती पर चुप्पी है। ट्रिब्यून ने बताया है कि सिक्योरिटी और फॉरेन ऑफिस ने यह कहते हुए कमेंट करने से इनकार कर दिया कि इस पर अभी कोई फैसला पब्लिक नहीं किया गया है।

    असीम मुनीर ने मार्को रुबियो से की बात

    बीते हफ्ते म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस के दौरान असीम मुनीर और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की बात हुई है। इनकी बातचीत में कथित तौर पर भी आईएसएफ में पाकिस्तानी सैनिकों के आने पर चर्चा हुई। हालांकि दोनों पक्षों ने इस बारे में जानकारी नहीं दी। पाकिस्तान इस मुद्दे पर घरेलू स्तर पर डरा हुआ है।

    पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने कुछ समय पहले कहा था कि पाकिस्तान गाजा फोर्स में शामिल होने पर तभी विचार करेगा जब उसका रोल सिर्फ पीसकीपिंग और ह्यूमन स्टेबिलाइजेशन तक ही सीमित रहे। पाकिस्तानी आर्मी हमास को डिसआर्म या किसी दूसरे फिलीस्तीनी ग्रुप को टारगेट नहीं करेगी।

    क्या है पाकिस्तान की मुश्किल

    पाकिस्तानी सेना और सरकार आईएसएफ से दूर होने की बात कहकर अमेरिका और ट्रंप को नाराज करने से बच रही है। दूसरी ओर वह अगर इसमें शामिल होती है तो घरेलू विरोध का सामना करना पड़ सकता है। पाकिस्तान की जनता में इजरायल और अमेरिका की गाजा नीति को लेकर गुस्सा देखा गया है।

    डोनाल्ड ट्रंप के आईएसएफ और गाजा के पुनर्निर्माण के प्लान को आम फिलिस्तीनियों के हाथों से ताकत पूरी तरह लेना माना जा रहा है। पाकिस्तान किसी सूरत में नहीं चाहेगा कि दुनिया में ऐसा संदेश जाए, जिसमें वह हमास से लड़ता हुआ या फिलिस्तीनियों की भावना के खिलाफ दिखे। ऐसा संदेश घर में ही शहबाज और मुनीर की मुश्किल बढ़ा देगा।

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