भाषण की वास्तविक ट्रांसक्रिप्ट चाहिएः सुप्रीम कोर्ट
पीठ ने कहा, ”श्रीमान सॉलिसिटर, हमें भाषण की वास्तविक ट्रांसक्रिप्ट चाहिए। जिस पर उन्होंने भरोसा किया है और जो आप कह रहे हैं, वह अलग है। हम निर्णय करेंगे। उन्होंने जो कहा है, उसकी वास्तविक प्रतिलिपि होनी चाहिए। आपके पास अपने कारण हो सकते हैं।” पीठ ने कहा, ”कम से कम उन्होंने जो कहा, उसका सही अनुवाद होना चाहिए…… आपका अनुवाद सात से आठ मिनट तक चलता है, जबकि भाषण केवल तीन मिनट का है। हम कृत्रिम बुद्धिमत्ता के युग में हैं; अनुवाद में कम से कम 98 प्रतिशत सटीकता होनी चाहिए।”
जो मौजूद नहीं वो बात कहां से आ गई: सिब्बल
सिब्बल ने अनुवाद पर सवाल उठाते हुए कहा, ”वांगचुक ने अपना अनशन जारी रखा…… और नेपाल का संदर्भ देकर युवाओं को उकसाना भी जारी रखा…… यह पंक्ति कहां से आ रही है? यह एक बहुत ही अनोखा नजरबंदी आदेश है – आप ऐसी बात पर भरोसा कर रहे हैं जो मौजूद ही नहीं है और फिर कहते हैं कि यह व्यक्तिपरक संतुष्टि पर आधारित है।”
नटराज ने अदालत को बताया कि ट्रांसक्रिप्ट के लिए एक विभाग है और कहा, ”हम इसमें विशेषज्ञ नहीं हैं।” इस मामले की सुनवाई गुरुवार को फिर से होगी। केंद्र ने इससे पहले शीर्ष अदालत को बताया था कि वांगचुक की हिरासत के बाद से 24 बार चिकित्सकीय जांच की गई है और वह ”स्वस्थ, तंदुरुस्त और ठीक हैं।”
केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में क्या जवाब दिए
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ से कहा कि जिन आधारों पर वांगचुक की नजरबंदी का आदेश जारी किया गया था, वे अब भी बने हुए हैं और स्वास्थ्य कारणों से उन्हें रिहा करना संभव नहीं होगा। सुप्रीम कोर्ट वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई कर रही है, जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (रासुका), 1980 के तहत उनकी (वांगचुक की) नजरबंदी को अवैध घोषित करने का अनुरोध किया गया है।













