पिछले डेढ़ साल में इन कीमती धातुओं ने निवेशकों को मालामाल कर दिया है। सोना 101% और चांदी 167% तक बढ़ी है। इकनॉमिक टाइम्स के मुताबिक जानकारों का कहना है कि अब इन धातुओं में बड़ा दांव लगाना जोखिम भरा हो सकता है। पिछले 18 महीनों में, डॉलर के हिसाब से सोना 101% और रुपये के हिसाब से 116% बढ़ा है। वहीं, चांदी डॉलर के हिसाब से 167% और रुपये के हिसाब से 198% उछली है। हालांकि, जनवरी 2026 में अपने हालिया रिकॉर्ड स्तर से अंतरराष्ट्रीय चांदी में 36.63% और सोने में 7.8% की गिरावट आई है।
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क्या है एक्सपर्ट्स की राय?
डीएसपी म्यूचुअल फंड के हेड (प्रोडक्ट्स और मार्केट स्ट्रैटेजिस्ट) साहिल कपूर कहते हैं, ‘अगर आपने पिछले डेढ़ साल में सोना और चांदी खरीदा है, तो यह मुनाफा कमाने और किनारे बैठने का समय है।’
‘द वेल्थ कंपनी’ के मैनेजिंग पार्टनर और हेड ऑफ स्ट्रैटेजी अक्षय चिंचालकर का कहना है कि पिछले कुछ सालों में कीमतों में आई तेज उछाल के बाद अब कीमती धातुएं परफेक्ट दाम पर पहुंच गई हैं। चिंचालकर सलाह देते हैं कि एकमुश्त पैसा लगाने से पहले बड़ी गिरावट का इंतजार करना चाहिए। वे यह भी कहते हैं कि सोने में निवेश बढ़ाने के लिए सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) यानी किस्तों में निवेश करना बेहतर विकल्प है।
क्या फिर बढ़ेगी सोने-चांदी की कीमत?
जानकारों का मानना है कि अब इन धातुओं में और ज्यादा मुनाफा कमाने की उम्मीद कम है और जोखिम बढ़ गया है। इसलिए जो लोग मुनाफा कमा चुके हैं, उन्हें अब अपना पैसा निकाल लेना चाहिए। जो नए निवेशक निवेश करना चाहते हैं, उन्हें भी बड़ी रकम लगाने से बचना चाहिए और अगर निवेश करना ही है तो SIP के जरिए धीरे-धीरे निवेश करना चाहिए।
यह सलाह इसलिए दी जा रही है क्योंकि सोने और चांदी की कीमतें पहले ही बहुत ज्यादा बढ़ चुकी हैं और अब इनमें और तेजी की संभावना कम है। वहीं, औद्योगिक मांग बढ़ने से चांदी को कुछ सहारा मिल सकता है, लेकिन यह भी पूरी तरह से कीमतों को ऊपर ले जाने के लिए काफी नहीं है। इसलिए, समझदारी इसी में है कि मौजूदा मुनाफावसूली की जाए और बाजार पर नजर रखी जाए।














