बच्चों की सुरक्षा के लिए सरकार की बड़ी तैयारी
केंद्रीय मंत्री ने इस तरह के संकेत दिए हैं कि सरकार आने वाले वक्त में डीपफेक और सोशल मीडिया पर उम्र के आधार पर कंटेंट को लेकर कड़े रेगुलेशन ला सकती है। वैष्णव ने कहा कि बच्चों को सुरक्षित किए जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि कई देश ये मान चुके हैं कि उम्र के आधार पर कंटेंट और एक्सेस कंट्रोल करना जरूरी है। उन्होंने डीपीडीपी एक्ट का जिक्र करते हुए कहा कि भारत ने डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट में भी एड बेस़्ड कैटेगरी बनाई थी कि, जिसमें इस बात का जिक्र है कि कौन सा कंटेंट बच्चों की पहुंच में होना चाहिए और कौन सा नहीं। बता दें कि ग्लोबल स्तर पर बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन करने की बात की जा रही है।
उन्होंने कहा कि इंडस्ट्री के साथ सरकार इस तरह की बातचीत कर रही है कि अब और अब किस तरह के कड़े रेगुलेशन की जरूरत है। वैष्णव ने कहा कि संसदीय कमिटी ने भी इसका अध्ययन किया है और सुझाव दिए हैं। संसद में इस संबंध में इस तरह के नियमों को लेकर सहमति बनानी होगी। उन्होंने कहा कि जहां तक नेटफ्लिक्स, मेटा और X का सवाल है तो सबको देश के कानूनी फ्रेमवर्क और संविधान के दायरे में काम करना होगा।
नकारात्मक AI से निपटने के लिए आम सहमति पर बात जारी
वैष्णव ने कहा कि ग्लोबल लीडर्स में इस बात को लेकर सहमति है कि हर किसी को लगता है कि AI का इस्तेमाल सकारात्मक कामों के लिए ही होना चाहिए। नकारात्मक प्रभाव से निपटने के लिए एक टेक्नो लीगल अप्रोच जरूरी है। उन्होंने कहा कि AI सेफ्टी इंस्टिट्यूट के जरिए हम इस तरह के सॉल्यूशन तैयार करने की दिशा में काम कर रहे हैं, जिससे कि एआई के नकारात्मक प्रभाव को खत्म किया जा सके।
उन्होंने AI को ये पांचवी औद्योगिक क्रांति करार दिया और कहा कि इसके कारण हेल्थ केयर से लेकर एजकुशेन सब किफायती हो जाएगा अगले 2 वर्षों में 200 बिलियन डॉलर का निवेश- वैष्णव ने कहा कि आईटी स्टैक के पाचों स्तरों के जरिए निवेश आ रहा है। डीपटेक के लिए फंड के साथ साथ बड़े सॉल्यूशन्स और एप्लीकेशन्स के लिए भी फंड की प्रतिबद्धता देख रहे हैं।













