• Religion
  • Chandra Grahan 2026: 03 मार्च 2026 को है खण्ड ग्रस्तोदित चन्द्र ग्रहण, जानें ग्रहण योग का असर

    Chandra Grahan 2026 Date and Time: 03 मार्च 2026, दिन मंगलवार को ग्रस्तोदित चन्द्र ग्रहण का मोक्ष सायं 06 बजकर 47 मिनट पर है, परन्तु इस चन्द्र ग्रहण का सूतक सूर्योदय से ही प्रारम्भ हो जाएगा। ग्रहण लगे हुए चन्द्रमा का उदय प्रयागराज में सायं 6 बजकर 19 मिनट पर होगा, अलग-अलग शहरों में चन्द्रोदय


    Azad Hind Desk अवतार
    By Azad Hind Desk फरवरी 18, 2026
    Views
    728 x 90 Advertisement
    728 x 90 Advertisement
    300 x 250 Advertisement
    Chandra Grahan 2026 Date and Time: 03 मार्च 2026, दिन मंगलवार को ग्रस्तोदित चन्द्र ग्रहण का मोक्ष सायं 06 बजकर 47 मिनट पर है, परन्तु इस चन्द्र ग्रहण का सूतक सूर्योदय से ही प्रारम्भ हो जाएगा। ग्रहण लगे हुए चन्द्रमा का उदय प्रयागराज में सायं 6 बजकर 19 मिनट पर होगा, अलग-अलग शहरों में चन्द्रोदय का समय भिन्न रहेगा।

    ग्रहण का वैज्ञानिक आधार
    ग्रहण के समय जल, अन्न आदि में सूक्ष्म जीवाणु एकत्र हो जाते हैं, जिससे वह दूषित हो जाता है, अतः जल आदि बर्तनों में कुशा डालकर रखना चाहिए, कुशा में कीटाणु एकत्र हो जाते हैं और ग्रहण के बाद उन कुशाओं को निकाल देना चाहिए, फिर स्नान के बाद ही भोजन करना चाहिए। ऐसा न करने से और ग्रहण के समय भोजन करने से यह सूक्ष्म जीवाणु भोजन के साथ पेट में चले जाते हैं जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होते हैं। शोध द्वारा यह स्पष्ट है कि ग्रहण के समय व्यक्ति की पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है, अतःग्रहण के समय अजीर्ण जैसे रोगों की सम्भावनाऐं अधिक से अधिक रहती हैं, इसलिए ऋषि-महर्षियों ने बालक और रोगियों को छोड़कर सभी के लिए ग्रहण लगने के समय भोजन करने से मना किया है।

    गर्भवती स्त्रियां रखें ध्यान
    ग्रहण के समय गर्भवती स्त्रियों को घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए क्योंकि गर्भस्थ शिशु के शरीर में ग्रहण के कारण विकार उत्पन्न होने की सम्भावनाऐं अधिक से अधिक होती हैं, ग्रहण के समय हानिकारक विकरणें अनवरत प्रवाहित होती रहती हैं, चन्द्र और सूर्य ग्रहण के समय पराबैंगनी, गामा जैसी अन्य विकरणें निकलती हैं, सामान्य तौर पर ओजोन की परत उन्हें सोख कर आमजन तक नहीं पहुंचने देती, लेकिन ग्रहण काल में ये विकरणें गर्भ में पल रहे कोमल शिशु के लिए हानिकारक सिद्ध हो सकती हैं।

    ग्रहण योग
    चन्द्रमा मन का कारक होता है, जब कभी राहु के द्वारा ग्रहण योग बने तो ऐसे समय उत्पन्न होने वाले बालक जीवन में अशान्ति का अनुभव करता है, स्वयं निर्णय लेने में कठिनाइयां आती हैं। मानसिक अस्थिरता और ग्रहण दोष से बचने के लिए सफेद चीजें, चीनी, चावल, दही आदि का दान करना चाहिए। चन्द्रमा के मंत्रों का जप करने से चन्द्रमा बलवान होता है, ग्रहण के बाद ऐसे बालकों को पूर्णिमा के दिन चांदी से निर्मित अर्द्धचन्द्रमा चन्द्रमा के मंत्रों द्वारा अभिमंत्रित कर गले में धारण कराना चाहिए।

    728 x 90 Advertisement
    728 x 90 Advertisement
    300 x 250 Advertisement

    हर महीने  ₹199 का सहयोग देकर आज़ाद हिन्द न्यूज़ को जीवंत रखें। जब हम आज़ाद हैं, तो हमारी आवाज़ भी मुक्त और बुलंद रहती है। साथी बनें और हमें आगे बढ़ने की ऊर्जा दें। सदस्यता के लिए “Support Us” बटन पर क्लिक करें।

    Support us

    ये आर्टिकल आपको कैसा लगा ? क्या आप अपनी कोई प्रतिक्रिया देना चाहेंगे ? आपका सुझाव और प्रतिक्रिया हमारे लिए महत्वपूर्ण है।