सांब के पेट से मूसल का जन्म
उन यादव कुमारों ने ऋषियों के शाप की बात राजा उग्रसेन को बताई। कुछ समय बाद सांब के पेट से एक मूसल पैदा हुआ। उग्रसेन ने उस लोहे के मूसल का चूर्ण बनवाकर समुद्र में फिंकवा दिया। ताकि उस शाप से छुटकारा मिल सके। जहां उस चूर्ण को फेंका गया वहां पर बहुत से सरकंडे उत्पन्न हो गए। लेकिन इसमें एक लोहे का टुकड़ा बच गया था जिसे एक मछली निगल गई। उस मछली को मछुआरों ने पकड़ लिया और उसके पेट से जो मूसल का टुकड़ा निकला उसे जरा नामक शिकारी ने अपने पास रख लिया।
भगवान को द्वारका में दिखे अशुभ संकेत
भगवान श्रीकृष्ण ने द्वारका पुरी में बड़े संकट के आने से पहले होने वाले अशुभ संकेत देखे। इसी समय देवताओं ने वायु को दूत बनाकर भगवान श्र कृष्ण के पास भेजा और स्वलोक लौटने की विनती की। तब भगवान ने कहा कि अब मैंने यादवों के नाश का आरंभ कर दिया है। इन यादवों का संहार हुए बिना अभी तक पृथ्वी का भार हल्का नहीं हुआ है। अब सात रात्रि के भीतर इनका संहार करके पृथ्वी का भार उतार कर मैं स्वधाम लौट आउंगा। जिस प्रकार यह द्वारका की भूमि मैंने समुद्र से मांगी थी इसे उसी प्रकार उसे लौटाकर और यादवों का संहार कर मैं लौट आऊंगा।
यादव कुल का विनाश
द्वारका में पाप अपने चरम पर पहुंच गया। तब भगवान श्री कृष्ण बलराम के साथ प्रभास क्षेत्र पहुंचे। इस दौरान भोजन करते समय यादवों में विवाद और हाथापाई होने लगी। तब सभी यादव एक-दूसरे पर शस्त्र प्रहार करने लगे और जब शस्त्र समाप्त हो गए तो पास में उगे हुए लोहे के समान उन सरकंडों को तोड़कर उससे प्रहार करने लगे। जब भगवान श्री कृष्ण ने उन्हें आपस में लड़ने से रोका तो उनकी बात की अवहेलना की। तब भगवान कृष्ण ने कुपित होकर उनके वध करने के लिए एक मुट्ठी सरकंडे उठा लिए। वे मुट्ठीभर सरकंडे लोहे के मूसल के समान हो गए। उन सरकंडों से भगवान सम्पूर्ण आततायी यादवों को मारने लगे। कुछ क्षण के बाद भगवान श्री कृष्ण और उनके सारथी दारुक को छोड़कर और कोई यदुवंशी जीवित नहीं बचा।
भगवन श्रीकृष्ण का देह त्याग
प्रभास क्षेत्र में यादवों के विनाश के बाद शोक करते हुए भगवान वन में एक पीपल पेड़ के नीचेपैर पर पैर रखकर योग निद्रा में विश्राम करने लगे। इसी समय, बचे हुए मूसल के टुकड़े को बाण में लगाकर वहां जरा नामक शिकारी आया। भगवान कृष्ण के अंगुठे को मृग की आंख जानकर उसने दूर से ही बाण चला दिया। लेकिन वहां पहुंचने पर उसने एक चतुर्भुज धारी मनुष्य देखा। यह देखते ही वह भगवान के चरणों में गिरकर अपने अपराध के लिए क्षमा मांगने लगा। तब भगवान ने कहा कि यह सब मेरी ही इच्छा से हुआ है और यही होना भी था। अब तुम भी मुक्ति के अधिकारी हो गए हो। और वहां एक दिव्य विमान प्रकट हुआ और जरा नामक शिकारी परलोक चला गया है। उसके चले जाने पर भगवान श्री कृष्ण ने इस मनुष्य देह का त्याग कर दिया और स्वधाम लौट गए।













